सोशल संवाद / डेस्क : देश में हवाई किराये को नियंत्रित करने और विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। सरकार के अनुसार, इन नियमों को प्रकाशित होने में करीब दो सप्ताह का समय लग सकता है।
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इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ कर रही है। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से अगली सुनवाई के दौरान संबंधित नियम पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है।
हवाई किराये और विमानन क्षेत्र के नियमन पर नजर
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला विमानन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने से जुड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण ने याचिका दाखिल कर विमानन क्षेत्र के संचालन की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण गठित करने की मांग की है।
याचिका में यात्रियों की सुरक्षा, विमानन सेवाओं में पारदर्शिता और हवाई किराये से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत उठाई गई है। त्योहारों, छुट्टियों और अन्य विशेष अवसरों पर हवाई टिकटों की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर भी यात्रियों की ओर से लगातार चिंता जताई जाती रही है।
केंद्र सरकार ने अदालत को क्या बताया?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को जानकारी दी कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। सरकार ने बताया कि नियमों के प्रकाशन में लगभग दो सप्ताह लग सकते हैं।
अदालत ने केंद्र सरकार से अगली सुनवाई पर इन नियमों को पेश करने के लिए कहा है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई 16 नवंबर को होगी, जिसमें नियमों और विमानन क्षेत्र के नियमन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
पहले भी नियमों को लेकर जानकारी दे चुका है केंद्र
इससे पहले 17 अगस्त को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नियम तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है। उस दौरान सरकार ने नियमों का मसौदा सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने प्रस्तुत किया था। साथ ही बताया गया था कि नियमों को अंतिम रूप देने के लिए कुछ विचार-विमर्श बाकी है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी हवाई किराये को तर्कसंगत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था और केंद्र सरकार से यात्रियों को राहत देने के उपायों पर विचार करने को कहा था।
यात्रियों को क्या मिल सकती है राहत?
विमानन क्षेत्र के लिए प्रभावी नियामक व्यवस्था और स्पष्ट नियम लागू होने से किराये में पारदर्शिता, यात्रियों के हितों की सुरक्षा और विमानन सेवाओं की निगरानी जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, हवाई किराये पर सीधे नियंत्रण या यात्रियों को तत्काल राहत मिलने के संबंध में किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अब सभी की नजरें 16 नवंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं। इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा नियम पेश किए जाने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।











