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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- मूर्ति छूना ईश्वर का अपमान कैसे:सबरीमाला के वकील बोले- भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी

By Riya Kumari

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- मूर्ति छूना ईश्वर का अपमान कैसे:सबरीमाला के वकील बोले- भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी
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सोशल संवाद / डेस्क : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। कोर्ट ने पूछा, ‘मूर्ति छूना ईश्वर का अपमान कैसे हो सकता है।’

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, ‘क्या संविधान उस भक्त की मदद के लिए आगे नहीं आएगा, जिसे केवल उसके वंश और जन्म के कारण देवता को छूने से रोक दिया जाता है।’

इस पर सबरीमाला के वकील एडवोकेट वी. गिरी ने कहा किसी भी मंदिर में होने वाले रीति-रिवाज उस धर्म का अभिन्न हिस्सा होते हैं। पूजा देवता की विशेषताओं के उलट नहीं हो सकती। भगवान अयप्पा ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ हैं, इसलिए वहां की परंपराएं उसी के अनुरूप तय की गई हैं।

कल आ सकता है फैसला

सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। इसके साथ धार्मिक आस्था के 66 मामले और जुड़े हैं। फैसला कल आने की संभावना है।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है।

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