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Fake ST Certificate Case: सुप्रीम कोर्ट ने MCGM इंजीनियर को दी राहत, पेंशन समेत रिटायरमेंट लाभ का आदेश

By Tamishree Mukherjee

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Supreme Court Fake ST Certificate Case
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सोशल संवाद / डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जनजाति (ST) के अमान्य प्रमाण पत्र के आधार पर बृहन्मुंबई नगर निगम (MCGM) में जूनियर सिविल इंजीनियर के पद पर नियुक्त कर्मचारी शिरीष पी. पाटिल को बड़ी राहत दी है। प्रमाण पत्र अमान्य पाए जाने के बावजूद लंबी सेवा अवधि को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ और पेंशन के साथ रिटायर होने की अनुमति दी।

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यह मामला फर्जी या गलत ST Certificate के आधार पर सरकारी नौकरी पाने और लंबे समय तक सेवा में बने रहने से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

मामला वर्ष 1984 से शुरू होता है। शिरीष पी. पाटिल ने खुद को ‘टोकरे कोली’ अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से संबंधित बताते हुए एक प्रमाण पत्र हासिल किया था। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर वर्ष 1994 में बृहन्मुंबई नगर निगम (MCGM) में उनकी नियुक्ति जूनियर सिविल इंजीनियर के पद पर हुई।

बाद में उन्होंने अपना मूल प्रमाण पत्र खो जाने की बात कहते हुए वर्ष 2000 में भुसावल के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) से एक नया प्रमाण पत्र भी हासिल किया।

जांच में प्रमाण पत्र पर उठे सवाल

MCGM की ओर से कराई गई जांच में सामने आया कि पाटिल के पूर्वजों के रिकॉर्ड में उन्हें ‘कोली’, ‘हिंदू कोली’ और ‘हिंदू सूर्यवंशी कोली’ जैसी श्रेणियों में दर्ज किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि ये श्रेणियां अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल नहीं थीं। इसके बाद जुलाई 2009 में पाटिल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

करीब एक दशक तक चली जांच प्रक्रिया

मामले की जांच के दौरान पाटिल ने वकीलों और परिजनों की अनुपलब्धता समेत विभिन्न कारणों का हवाला देकर कार्यवाही को लंबे समय तक टालने की कोशिश की। आखिरकार जनवरी 2020 में जांच समिति ने उनके ST प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया। इस फैसले को बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

30 जून 2025 को हुए सेवानिवृत्त

प्रमाण पत्र अमान्य घोषित होने और कानूनी प्रक्रिया चलने के बावजूद पाटिल ने MCGM में अपनी सेवा जारी रखी। वह 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुए। यानी ST प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक नगर निगम में सेवा की। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां उनकी लंबी सेवा अवधि और पूरे मामले की परिस्थितियों पर विचार किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी राहत?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की पूरी पृष्ठभूमि और पाटिल की लंबी सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए उन्हें सेवा से जुड़े सेवानिवृत्ति लाभ और पेंशन दिए जाने की अनुमति दी।

इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि किसी कर्मचारी का प्रमाण पत्र अमान्य पाए जाने के बावजूद, अदालत परिस्थितियों, सेवा की अवधि और मामले के अन्य पहलुओं को देखते हुए राहत देने पर विचार कर सकती है। हालांकि, यह राहत प्रमाण पत्र को वैध ठहराने के बराबर नहीं है। पाटिल का ST प्रमाण पत्र जांच समिति द्वारा अमान्य घोषित किया जा चुका था और हाई कोर्ट भी उस निर्णय को बरकरार रख चुका था।

सरकारी नौकरी में ST प्रमाण पत्र की जांच क्यों महत्वपूर्ण?

अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों के जाति एवं जनजाति प्रमाण पत्रों का सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

गलत या अमान्य प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने से वास्तविक पात्र उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि ऐसे मामलों में जांच समितियां प्रमाण पत्र और संबंधित पारिवारिक रिकॉर्ड की जांच करती हैं।

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