---Advertisement---

क्रिकेट संस्थाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘जिन्हें बल्ला पकड़ना भी नहीं आता, वे दूर रहें’

By Muskan Thakur

Published :

Follow

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क : देश की शीर्ष अदालत ने खेल प्रशासन, खासकर क्रिकेट संस्थाओं के संचालन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि क्रिकेट संघों का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए, जिन्हें खेल की समझ हो और जिन्होंने खुद क्रिकेट खेला हो। कोर्ट की टिप्पणी थी कि जिन लोगों को “बल्ला पकड़ना भी नहीं आता”, उन्हें क्रिकेट जैसी तकनीकी और संवेदनशील खेल संस्थाओं के प्रबंधन से दूर रहना चाहिए।

ये भी पढे : जमशेदपुर में एमटीएमएच व टाटा स्टील फाउंडेशन का निवारक ऑन्कोलॉजी पर सामुदायिक जागरूकता अभियान

यह टिप्पणी महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (MCA) से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने खेल संस्थाओं में गैर-विशेषज्ञों की बढ़ती दखलअंदाजी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्रिकेट संघों का संचालन संन्यास प्राप्त क्रिकेटरों या खेल से जुड़े अनुभवी लोगों को करना चाहिए, न कि राजनीतिक या अन्य गैर-खेल पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को।

MCA चुनाव विवाद पर सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के चुनावों से जुड़े विवाद पर सुनवाई कर रही थी। यह चुनाव मूल रूप से 6 जनवरी को होने वाले थे, लेकिन बंबई हाई कोर्ट ने उन पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने MCA की सदस्यता प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 1986 से 2023 के बीच संघ के कुल 164 सदस्य थे, लेकिन इसके बाद अचानक बड़ी संख्या में नए सदस्यों को शामिल किया गया। कोर्ट ने इसे असामान्य बताते हुए पूछा कि इतने वर्षों में सदस्य संख्या सीमित रही और फिर अचानक इसमें तेज बढ़ोतरी कैसे हो गई।

भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप

इस मामले में MCA पर भाई-भतीजावाद और पक्षपात जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट इन आरोपों से जुड़ी कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में MCA द्वारा दायर याचिका भी शामिल थी, जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

कोर्ट ने यह जानने की कोशिश की कि सदस्यता बढ़ाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी और क्या इसमें नियमों का पालन किया गया। प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया कि क्या यह प्रक्रिया वास्तव में खेल के हित में थी या फिर किसी खास समूह को फायदा पहुंचाने के लिए की गई।

सदस्यता प्रक्रिया पर सफाई

MCA और याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि सदस्यता प्रक्रिया की निगरानी एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति ने की थी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान 48 आवेदनों को खारिज कर दिया गया था, जबकि बाकी को नियमों के तहत शामिल किया गया।

हालांकि, कोर्ट ने इस दलील पर भी संतोषजनक जवाब मांगा और संकेत दिया कि खेल संस्थाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि खेल संघ केवल प्रशासनिक निकाय नहीं हैं, बल्कि वे खिलाड़ियों के भविष्य और खेल की साख से सीधे जुड़े होते हैं।

खेल प्रशासन पर सुप्रीम कोर्ट का संदेश

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सिर्फ MCA तक सीमित नहीं मानी जा रही है। इसे देशभर की क्रिकेट और अन्य खेल संस्थाओं के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खेल का संचालन उन लोगों के हाथ में होना चाहिए, जिनके पास खेल का अनुभव, समझ और खिलाड़ियों की जरूरतों की वास्तविक जानकारी हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आने वाले समय में खेल प्रशासन में सुधार की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। इससे खेल संस्थाओं में पेशेवराना सोच को बढ़ावा मिलेगा और राजनीति या गैर-खेल हस्तक्षेप पर अंकुश लग सकता है।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

Exit mobile version