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गृहिणियों का काम कम नहीं, मुआवजे में 30 हजार रुपये मासिक आय मानी जाए – Supreme Court

By Tamishree Mukherjee

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Supreme Court, Housewives News

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सोशल संवाद / डेस्क : देश की सर्वोच्च अदालत ने गृहिणियों के योगदान को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि घर और परिवार की जिम्मेदारियां संभालने वाली महिलाओं के कार्यों का आर्थिक मूल्य कम करके नहीं आंका जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना में किसी गृहिणी की मृत्यु होने की स्थिति में मुआवजे की गणना करते समय उसके घरेलू कार्यों का मूल्यांकन कम से कम 30,000 रुपये प्रतिमाह की आय के आधार पर किया जाना चाहिए।

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अदालत ने कहा कि गृहिणियां केवल घर की देखभाल करने वाली नहीं होतीं, बल्कि वे परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं। उनके योगदान को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

घरेलू काम का भी है आर्थिक मूल्य

सुप्रीम Court ने सुनवाई के दौरान कहा कि भोजन बनाना, बच्चों की परवरिश करना, बुजुर्गों की देखभाल करना, घर की व्यवस्था संभालना और परिवार की जरूरतों का ध्यान रखना जैसे कार्य बेहद महत्वपूर्ण हैं। भले ही इन कार्यों के बदले कोई वेतन नहीं मिलता, लेकिन इनकी आर्थिक उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि इन्हीं कार्यों को करने के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त किया जाए तो परिवार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी। इसलिए मुआवजे के मामलों में गृहिणी के योगदान का वास्तविक मूल्यांकन किया जाना जरूरी है।

मुआवजा निर्धारण में आएगा बड़ा बदलाव

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में मोटर दुर्घटना दावा मामलों और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इससे अदालतों और बीमा कंपनियों को गृहिणियों के कार्यों का उचित आर्थिक मूल्य तय करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से उन परिवारों को न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी जिन्होंने किसी दुर्घटना में अपनी पत्नी, मां या परिवार की अन्य महिला सदस्य को खो दिया है।

‘अदृश्य श्रम’ को मिली पहचान

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया है। उनका कहना है कि घरेलू कार्यों को लंबे समय से ‘अदृश्य श्रम’ माना जाता रहा है। लाखों महिलाएं बिना किसी वेतन के परिवार और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, लेकिन उनके कार्यों को आर्थिक आंकड़ों में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। संगठनों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी महिलाओं के श्रम को सम्मान और पहचान दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

गृहिणियां हैं परिवार की नींव

सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि गृहिणियां परिवार की आधारशिला होती हैं। वे बच्चों को संस्कार देती हैं, परिवार को एकजुट रखती हैं और सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में अदालत द्वारा उन्हें ‘राष्ट्रनिर्माता’ के रूप में मान्यता देना उनके योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

महिलाओं के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि घरेलू कार्यों का महत्व किसी भी पेशेवर कार्य से कम नहीं है। समाज और व्यवस्था को उन लाखों महिलाओं के योगदान को पहचानना होगा जो बिना किसी वेतन और औपचारिक पहचान के परिवार और देश को मजबूत बनाने में अपना जीवन समर्पित करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी महिलाओं के अदृश्य श्रम को सम्मान और आर्थिक मान्यता दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकती है।

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