सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी SIR प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है।
यह भी पढे : बिहार सरकार की नई ‘बिहार दर्शन’ नीति: अफसरों की विदेश यात्रा पर रोक, अब सपरिवार करेंगे राज्य भ्रमण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष एवं शुद्ध मतदाता सूची सुनिश्चित करने का अधिकार है। अदालत ने माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपनाना संविधान और कानून के खिलाफ नहीं है।
SIR के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची का सत्यापन करता है। इसमें मतदाताओं के दस्तावेज, पात्रता और रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जाती है, ताकि फर्जी या डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकें।
बिहार में यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
बिहार में 1 अक्टूबर 2025 को जारी हुई थी फाइनल लिस्ट
निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर 2025 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हटाए गए वोटर्स की सूची और कारण भी सार्वजनिक किए गए थे।
चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की फाइनल लिस्ट 1 अक्टूबर 2025 को जारी की थी। इसके बाद बिहार में वोटर्स की संख्या 6% घटकर 7.42 करोड़ हो गई। फाइनल लिस्ट से 69.29 लाख नाम कटे। 21.53 लाख नए नामों को जोड़ा गया।
SIR से पहले जून 2025 में बिहार में कुल 7.89 करोड़ वोटर्स थे। पहली ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद ये आंकड़ा 7.24 करोड़ हो गया। इसमें 65.63 लाख लोगों के नाम कटे थे। पहले ड्राफ्ट लिस्ट से जो 65 लाख नाम कटे थे, उसमें 17 लाख नामों को लिस्ट में जोड़ा गया। नई लिस्ट में 22.34 लाख लोग मृत पाए गए। 6.85 लाख लोगों के 2 जगह नाम मिले। 36.44 लाख लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं।










