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Paternity Leave पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से कानून बनाने की मांग, परवरिश में पिता भी बराबर

By Aditi Pandey

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Supreme Court strict on paternity leave

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सोशल संवाद/डेस्क: बच्चों की परवरिश को लेकर Paternity Leave पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और अहम संदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं होती, बल्कि पिता की भूमिका भी उतनी ही जरूरी और महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश यानी Paternity Leave को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाने का आग्रह किया है।

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जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पितृत्व अवकाश का प्रावधान समाज में पारंपरिक सोच को बदलने में मदद करेगा। इससे पिताओं को बच्चों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा और परिवार के साथ-साथ कार्यस्थल पर भी लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि परवरिश सिर्फ एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि यह माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है। समाज में अक्सर मां की भूमिका को ज्यादा अहम माना जाता है, लेकिन पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना गलत है। बच्चे के बेहतर विकास के लिए दोनों का बराबर योगदान जरूरी है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला लिया। कोर्ट ने कहा कि अब गोद लेने वाली हर मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जाएगी, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी क्यों न हो। पहले यह सुविधा सिर्फ तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेने पर ही मिलती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि पितृत्व अवकाश की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो माता-पिता और बच्चे दोनों की जरूरतों के अनुकूल हो। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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