---Advertisement---

प्याज-लहसुन को लेकर दायर PIL पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा ऐसी निराधार याचिकाओं से बर्बाद होता है समय

By Muskan Thakur

Published :

Follow

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क : देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में दायर की गई कुछ जनहित याचिकाओं पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। मामला प्याज और लहसुन से जुड़ी एक याचिका का था, जिसमें दावा किया गया था कि ये खाद्य पदार्थ तथाकथित “तामसिक ऊर्जा” से जुड़े हैं और इनसे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ये भी पढे : बोलानी टाउनशिप में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साह से मनाया, प्रतियोगिता व सम्मान समारोह आयोजित

इस याचिका को सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और याचिका दायर करने वाले वकील को कड़ी फटकार भी लगाई। अदालत ने साफ कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायपालिका का कीमती समय बर्बाद करती हैं।

अदालत ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ता से तीखे सवाल भी किए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या ऐसी याचिकाएं आधी रात को बैठकर तैयार की जाती हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब देश में कई गंभीर और महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं, तब इस तरह की बेबुनियाद याचिकाएं दायर करना न्यायिक प्रक्रिया पर अतिरिक्त बोझ डालता है।

एक साथ दायर की गई थीं कई याचिकाएं

जानकारी के अनुसार, संबंधित वकील द्वारा एक साथ कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में अलग-अलग मुद्दों को उठाया गया था, लेकिन अदालत ने उन्हें ठोस आधार के बिना दायर किया गया माना।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका का उद्देश्य समाज के महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दों को सामने लाना होता है, न कि ऐसे विषयों को उठाना जिनका कोई ठोस कानूनी या सामाजिक आधार नहीं हो।

प्याज और लहसुन को लेकर क्या था दावा

याचिका में यह दावा किया गया था कि प्याज और लहसुन का सेवन “तामसिक प्रवृत्ति” को बढ़ाता है और इससे समाज में नकारात्मक ऊर्जा का प्रसार हो सकता है।

हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे तर्कों का कोई कानूनी आधार नहीं है और इन्हें जनहित याचिका के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

अदालत ने दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह की निराधार याचिकाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने कहा कि जनहित याचिका का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

न्यायालय के अनुसार, अगर बिना ठोस तथ्यों और प्रमाण के याचिकाएं दायर की जाती हैं, तो इससे न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

PIL का उद्देश्य क्या है

जनहित याचिका यानी पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन का उद्देश्य उन लोगों को न्याय दिलाना होता है जो खुद अदालत तक नहीं पहुंच सकते। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की समस्याएं अदालत के सामने लाई जा सकें।

लेकिन जब इस प्रक्रिया का इस्तेमाल गैर-जरूरी या बेबुनियाद मामलों के लिए किया जाता है, तो इससे न्याय व्यवस्था की गंभीरता प्रभावित होती है।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

Exit mobile version