सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील प्लांट में ग्रीन स्टील प्रोजेक्ट को लेकर महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य स्टील उत्पादन के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों का इस्तेमाल करना है। यह कदम भारत के स्टील सेक्टर को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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11 हजार करोड़ रुपये का निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, टाटा स्टील झारखंड में करीब 11,000 करोड़ रुपये का निवेश कर उन्नत ग्रीन स्टील तकनीक विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा जमशेदपुर प्लांट में नई तकनीकों और आधुनिक उत्पादन प्रणाली के विकास पर खर्च किया जाएगा।
नई तकनीक से कम होगा कार्बन उत्सर्जन
ग्रीन स्टील प्रोजेक्ट के तहत HIsarna और EASyMelt जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये तकनीकें पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया की तुलना में काफी कम कार्बन उत्सर्जन करती हैं। कुछ मामलों में इनसे CO₂ उत्सर्जन में 50% से लेकर 80% तक कमी लाई जा सकती है।
इन तकनीकों से कम गुणवत्ता वाले आयरन अयस्क और स्थानीय कोयले का उपयोग भी संभव होगा, जिससे लागत घटेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
1 मिलियन टन क्षमता वाला नया प्लांट
इस परियोजना के तहत जमशेदपुर में लगभग 1 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता वाला नया प्लांट स्थापित करने की योजना है। यह प्लांट आधुनिक तकनीक के साथ पर्यावरण-अनुकूल स्टील उत्पादन का मॉडल बनेगा।
रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
ग्रीन स्टील प्रोजेक्ट से न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि झारखंड में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था और स्टील सेक्टर ।










