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AI की काली सच्चाई! क्या अब AI खुद साइबर हमले करने लगा है? चौंकाने वाला खुलासा सामने आया

By Riya Kumari

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AI की काली सच्चाई

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सोशल संवाद / डेस्क : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आम तौर पर भविष्य की सबसे पावरफुल टेक्नोलॉजी माना जाता है। यह सोशल मीडिया, बैंकिंग, हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्टेशन और लगभग हर डिजिटल फील्ड में हमारे काम को आसान बनाती है। लेकिन इस टेक्नोलॉजी का एक काला पहलू भी है जो तेजी से साइबर सिक्योरिटी के लिए खतरा बनता जा रहा है। सवाल यह उठता है: क्या AI खुद साइबर हमले कर सकता है? और क्या यह टेक्नोलॉजी भविष्य में दोधारी तलवार साबित हो सकती है?

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AI साइबर क्रिमिनल्स के लिए हथियार कैसे बन सकता है?

AI की सबसे बड़ी ताकत सीखने और पैटर्न को समझने की क्षमता है। लेकिन यही क्षमता गलत हाथों में खतरनाक साबित हो सकती है। हैकर्स अब AI का इस्तेमाल न सिर्फ डेटा चुराने के लिए कर रहे हैं, बल्कि डीपफेक वीडियो और ऑडियो जैसे ज़्यादा एडवांस्ड हमले करने के लिए भी कर रहे हैं: हैकर्स अब किसी की आवाज़ या चेहरे की नकल करके आसानी से बैंक अकाउंट या सिस्टम तक पहुंच सकते हैं।

ऑटोमेटेड फ़िशिंग: AI हज़ारों फ़िशिंग ईमेल बना सकता है जो इतने असली लगते हैं कि यूज़र्स आसानी से धोखा खा जाते हैं।

स्मार्ट मैलवेयर: AI-बेस्ड मैलवेयर सिक्योरिटी सिस्टम से बच सकते हैं, जिससे उन्हें डिटेक्ट करना बहुत मुश्किल हो जाता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI इंसानों से ज़्यादा तेज़ी से और स्मार्ट तरीके से हमला करने की क्षमता रखता है।

AI साइबर सिक्योरिटी का एक मज़बूत रक्षक भी है

दिलचस्प बात यह है कि जो AI खतरा पैदा करता है, वही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच भी बन सकता है। कई साइबर सिक्योरिटी कंपनियाँ रियल टाइम में हमलों का पता लगाने, डेटा को एन्क्रिप्ट करने और सिस्टम की कमज़ोरियों की पहचान करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं।

AI आधारित सुरक्षा प्रणाली

  • संदिग्ध गतिविधि का सेकंडों में पता लगाता है
  • नेटवर्क में घुसे मैलवेयर का पता लगाने में बहुत तेज़
  • बड़े डेटा को स्कैन करता है और तुरंत अलर्ट देता है
  • इसका मतलब है कि AI खतरा भी है और सुरक्षा भी। फर्क सिर्फ इतना है कि इसका इस्तेमाल कौन और कैसे कर रहा है।

ऐसा क्यों कहा जाता है कि AI एक दोधारी तलवार है?

AI के इस्तेमाल के फायदे और नुकसान दोनों हैं, इसीलिए इसे अक्सर दोधारी तलवार कहा जाता है। जहाँ यह साइबर सिक्योरिटी को मज़बूत करता है, वहीं यह अपराधियों को अपने हमलों को बेहतर बनाने की भी इजाज़त देता है। आने वाले सालों में साइबर हमले और भी ज़्यादा जटिल होने की उम्मीद है, और AI उनमें एक अहम भूमिका निभा सकता है।

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