सोशल संवाद/राँची : झारखंड के सभी 49 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में कमजोर श्रमिकों की क्षेत्र-आधारित पहचान और गणना की जाएगी। इसके बाद चिन्हित परिवारों का विस्तृत सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन होगा। ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। नगर विकास और आवास विभाग द्वारा इस योजना को केंद्र की दीनदयाल शहरी आजीविका मिशन योजना के तहत पूरा किया जाएगा।

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इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा रोजगार सृजन है। दरअसल, नगर विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी राज्य वार्षिक योजना का खाका तैयार कर लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर व्यवसायिक समूहों (वीओजी) और वीओजी लाथार्थियों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान करना है।
इस वार्षिक योजना में आजीविका मिशन एवं संरचनात्मक विकास को फोकस किया गया है। आजीविका मिशन के तहत रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने के लिए विभाग ने 10,000 वीओजी को बाजार की मांग के अनुसार कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 5000 वीओजी लाभार्थियों को बैंकों से ऋण और ब्याज सब्सिडी दी जाएगी।
आईएसबीटी, परिवहन नगर सड़क निर्माण कार्य होंगे पूरे
शहरी संरचनात्मक विकास की दिशा में नगर विकास विभाग ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें इंटर स्टेट बस टर्मिनल, परिवहन नगर, सड़क निर्माण कार्य प्रमुख है। रांची परिवहन नगर फेज-02 का निर्माण पूरा होगा। जमशेदपुर और धनबाद में परिवहन नगर निर्माण शुरू होगा। रांची, धनबाद और जमशेदपुर में आइएसबीटी बनना शुरू होगा। राज्य के यूएलबी में प्रमुख गोलचक्करों का पुनर्विकास व सौंदर्यीकरण शुरू होगा। बाबा बासुकीनाथ मंदिर में एफओबी और कैमरा लगाने का कार्य पूरा होगा।
जलापूर्ति परियोजनाओं से बदलेगी तस्वीर
वित्तीय वर्ष 2026-2027 में विभाग द्वारा बरहरवा, चास और गिरिडीह में तीन नई जलापूर्ति योजनाएं शुरू होंगी। यह अमृत 2.0 के तहत होगा। इनका मुख्य उद्देश्य शहरी और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन को आधुनिक बनाना और नागरिकों को नियमित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। अमृत 2.0 के तहत ही आदित्यपुर, हजारीबाग और सिमडेगा की महत्वपूर्ण जलापूर्ति परियोजनाओं के साथ-साथ चास सेप्टेज प्रबंधन योजना भी पूरी की जाएगी।









