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मानगो में न शोर-न पोस्टर, कई वार्डों में लोग कैंडिडेट का नाम तक नहीं जानते

By Riya Kumari

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मानगो
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सोशल संवाद / जमशेदपुर : मानगो नगर निगम चुनाव की सुगबुगाहट प्रशासनिक गलियारों में तो तेज है, लेकिन मोहल्लों की गलियों में चुनावी रंग पूरी तरह गायब है। चुनाव की तारीखें नजदीक हैं, पर न तो दीवारों पर चुनावी स्लोगन दिख रहे हैं और न ही प्रत्याशियों का शोर। स्थिति यह है कि जनता के बीच चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं है और कई इलाकों में तो लोग यह भी नहीं जानते कि उनके वार्ड से उम्मीदवार कौन है।

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Sunrise Enclave
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है : यदि प्रचार अभियान की यही रफ्तार रही तो इसका सीधा असर मतदान के दिन दिखेगा। जब तक मोहल्लों में चुनावी माहौल नहीं बनता, तब तक आम मतदाता घरों से बाहर नहीं निकलता। प्रशासन और प्रत्याशियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मतदाताओं में जोश भरने की है।

हमें तो पता ही नहीं वोट किसे देना है

मोहल्लों में चर्चा के दौरान कई लोगों ने दो-टूक कहा-अब तक कोई भी प्रत्याशी उनसे मिलने नहीं आया है। पिछली बार तो इस समय तक घर के बाहर पर्चों का अंबार लग जाता था, लेकिन इस बार तो पता ही नहीं चल रहा कि चुनाव कब है।

प्रत्याशियों का तर्क : अभी तो वार्म-अप है, पिक्चर अभी बाकी है

दूसरी ओर कुछ प्रत्याशियों ने कहा- वे अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया के बाद प्रचार में आक्रामकता आएगी और जल्द ही हर घर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए जनसंपर्क अभियान तेज किया जाएगा।

डिजिटल प्रचार या सुस्ती ?

क्या प्रत्याशी केवल डिजिटल कैंपेन के भरोसे हैं या फिर चुनावी खर्च की पाबंदियां उन्हें पोस्टर-बैनर से दूर रख रही हैं। वजह जो भी हो, मानगो की जनता फिलहाल चुनावी फील से दूर है।

क्यों फीका है चुनावी माहौल

वन-टू-वन संवाद गायबः इस बार प्रत्याशी डोर-टू-डोर कैंपेन के बजाय केवल सोशल मीडिया या चुनिंदा समर्थकों तक सीमित हैं। मतदाताओं से सीधा संवाद कम होने के कारण जागरूकता का अभाव है।

पोस्टर-बैनर का अकालः मेयर पद के 2-3 बड़े चेहरों को छोड़ दें, तो वार्ड पार्षदों ने अभी तक अपनी विजिबिलिटी नहीं बनाई है। शहर के चौक-चौराहों पर चुनावी होर्डिंग्स का सूखा पड़ा है।

मुद्दों पर सन्नाटाः उम्मीदवारों ने अभी तक अपनी प्राथमिकताओं या विकास के एजेंडे को लेकर जनता के बीच कोई ब्लूप्रिंट पेश नहीं किया है।

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