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UGC का नया आदेश: विश्वविद्यालयों को बनाना होगा ‘मेंटल हेल्थ फ्रेंडली’ कैंपस, छात्रों के तनाव पर होगा फोकस

By Riya Kumari

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UGC का नया आदेश: विश्वविद्यालयों को बनाना होगा ‘मेंटल हेल्थ फ्रेंडली’ कैंपस, छात्रों के तनाव पर होगा फोकस

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सोशल संवाद / डेस्क : देश में छात्रों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए University Grants Commission (UGC) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों को अपने कैंपस को मेंटल हेल्थ फ्रेंडली बनाना होगा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य व समग्र कल्याण को प्राथमिकता देनी होगी।

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छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता ध्यान

यूजीसी का कहना है कि पढ़ाई का दबाव, प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत समस्याओं के कारण कई छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इसलिए अब विश्वविद्यालयों को ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां छात्र खुद को सुरक्षित महसूस करें और अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात कर सकें।

कैंपस में बनेंगे मेंटल हेल्थ सेंटर

नई गाइडलाइंस के अनुसार हर विश्वविद्यालय में Mental Health & Well-Being Centre स्थापित करने की सिफारिश की गई है। यहां प्रशिक्षित काउंसलर छात्रों को गोपनीय रूप से सलाह और सहायता देंगे। साथ ही छात्रों के मानसिक तनाव की पहचान और समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

काउंसलर और अवेयरनेस प्रोग्राम होंगे जरूरी

यूजीसी ने संस्थानों से यह भी कहा है कि वे नियमित काउंसलिंग, तनाव प्रबंधन कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित करें। इसके अलावा छात्र-काउंसलर अनुपात तय करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि हर छात्र को जरूरत पड़ने पर उचित मदद मिल सके।

पढ़ाई के साथ खेल और गतिविधियों पर जोर

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालयों को केवल पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि खेल, शारीरिक गतिविधियों और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी बढ़ावा देना चाहिए। इससे छात्रों का मानसिक और शारीरिक संतुलन बेहतर रहेगा।

क्या है इस पहल का उद्देश्य

यूजीसी का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में ऐसा माहौल बनाना है जहां छात्र न केवल पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करें, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत और आत्मविश्वासी बन सकें। इससे छात्र आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण बनाने में भी मदद मिलेगी।

यूजीसी का यह कदम भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए बेहतर मानसिक सहायता व्यवस्था देखने को मिल सकती है।

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