सोशल संवाद / नई दिल्ली : लोकसभा में जन विश्वास विधेयक 2026 को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद राजकुमार रोत ने इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।
यह भी पढे : Rahul Gandhi Attack: केरल में BJP-LDF ‘साझेदारी’ का आरोप, मोदी सरकार पर भी साधा निशाना
“अमीर जुर्माना देकर छूटेगा, गरीब का क्या होगा?”
संसद में बोलते हुए राजकुमार रोत ने कहा कि यह विधेयक करीब 23 मंत्रालयों से जुड़े 800 अपराधों को जेल की सजा से हटाकर केवल जुर्माने तक सीमित कर देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जहां अमीर व्यक्ति आसानी से जुर्माना भरकर बच जाएगा, वहीं गरीब और आदिवासी समुदाय के लोग क्या करेंगे?
जेलों की हालत पर जताई चिंता
रोत ने देश की जेलों की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि लाखों विचाराधीन कैदी सालों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों की है।
उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य की जेलों में हजारों लोग छोटी-छोटी गलतियों के लिए बंद हैं, जबकि बड़े आर्थिक अपराधी खुले घूम रहे हैं।
पेसा कानून का भी किया जिक्र
सांसद ने PESA Act 1996 का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को मिले अधिकार आज तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए कानून लाने से पहले पुराने कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है।
गंभीर अपराधों पर केवल जुर्माना गलत
राजकुमार रोत ने मिलावटी और एक्सपायरी सामान बेचने, GST चोरी और बिजली चोरी जैसे मामलों में सिर्फ जुर्माने का प्रावधान रखने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
अपने संबोधन के अंत में रोत ने सरकार से इस विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कानून गरीब, आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों के हितों के खिलाफ है और न्याय व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।









