सोशल संवाद / डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर बना हुआ है और Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का सबसे अहम केंद्र बन गया है। ईरान ने जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की बात कही है, जबकि अमेरिका इसे दोबारा अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खोलने का दबाव बना रहा है।
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हालात इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि Strait of Hormuz दुनिया के प्रमुख तेल और गैस शिपिंग मार्गों में शामिल है। तनाव बढ़ने के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही काफी कम हुई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, 14 अगस्त को केवल कुछ ही जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि संघर्ष से पहले यहां रोजाना 130 से ज्यादा जहाजों की आवाजाही होती थी।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह जल्द ही Strait of Hormuz को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की योजना बना रहे हैं। ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह जलडमरूमध्य ईरानी ही रहेगा। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
जहाजों की सुरक्षा पर भी खतरा
हाल के दिनों में Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। 14 अगस्त को UAE की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने भी बताया कि उसके एक जहाज पर Hormuz से गुजरते समय हमला हुआ, हालांकि किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
बातचीत से समाधान की उम्मीद अभी कमजोर
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ औपचारिक बातचीत फिर शुरू करने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जरूर हो रहा है, लेकिन Hormuz को खोलने का मुद्दा अभी भी कई शर्तों से जुड़ा हुआ है।
Strait of Hormuz में लंबे समय तक जारी तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई देशों की नजर इस क्षेत्र में आगे होने वाले घटनाक्रम पर बनी हुई है।









