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बंगाल में मतदाताओं का गणित बदला; 91 लाख नाम कटे

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 90.83 लाख नाम हटे हैं। यह आंकड़ा राज्य के कुल मतदाताओं का 11.85% है। पिछले साल नवंबर में शुरू हुई प्रक्रिया के बाद 28 फरवरी को आई सूची में 63.66 लाख नाम हटे थे, तब 60.06 लाख वोटर्स ‘विवेचनाधीन’ श्रेणी में रखे गए थे।

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जांच के बाद, इन 60.06 लाख में से 27.16 लाख और नाम हटाए गए हैं। वहीं, 32.68 लाख को पात्र मानकर सूची में शामिल किया गया है। करीब 22,163 लोगों के मामले में ई-हस्ताक्षर न होने से उनके नाम अभी सूची में दर्ज नहीं हैं। जिनके नाम कटे हैं उनकी मदद के लिए 19 न्यायाधिकरण बनने थे। हालांकि अभी शुरू नहीं हो सके। तार्किक विसंगति सूची में शामिल लोगों के दस्तावेज, नाम में गलती थी या माता-पिता के साथ उम्र के अंतर पर संदेह था। बंगाल में पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग होगी।

60% नाम छह जिलों से हटे, 81% सीटें टीएमसी के पास

तार्किक विसंगति में हटाए गए नामों का सबसे ज्यादा असर मुस्लिम बहुल व सीमावर्ती जिलों में है। इन 6 जिलों-मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, नदिया, उत्तर व दक्षिण 24 परगना से करीब 60% नाम हटे हैं। इनमें से टॉप 5 जिलों में 115 सीटें हैं और इनमें से 93 (81%) सीटें अभी टीएमसी के पास हैं।

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