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सरायकेला में गहराता जल संकट, 85 गांवों में पानी की किल्लत, 600 फीट नीचे पहुंचा जलस्तर

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में इस बार गर्मी शुरू होने से पहले ही जल संकट की गंभीर तस्वीर सामने आने लगी है। मार्च महीने में ही हालात ऐसे हो गए हैं कि कई गांवों में लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिले में भूजल स्तर सामान्य से कई गुना नीचे चला गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

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जानकारी के अनुसार, जिले के करीब 85 गांवों में भूजल स्तर 350 से 400 फीट नीचे पहुंच चुका है, जबकि कुछ इलाकों में यह 600 से 700 फीट तक गिर गया है। आम तौर पर यहां पानी 50 से 70 फीट की गहराई पर मिल जाता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। इस गिरते जल स्तर के कारण चापाकल और कुएं सूखते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कुचाई प्रखंड के रोलाहातु और गोमियाडीह जैसे क्षेत्रों में स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है, जहां पानी 600 फीट से भी नीचे चला गया है। इसके अलावा पहाड़पुर, पाठनमारा, कोपी, महुलडिया और गम्हरिया जैसे इलाकों में भी जल स्तर लगातार गिर रहा है। कुकड़ू, खरसावां, ईचागढ़ और नीमडीह के कई गांवों में भी यही हाल देखने को मिल रहा है।

जल संकट को और बढ़ाने वाली एक बड़ी समस्या है खराब पड़े चापाकल और जल मीनार। जिले में लगाए गए करीब 16 हजार से अधिक चापाकलों में से एक हजार से ज्यादा मरम्मत के अभाव में बेकार हो चुके हैं। वहीं, कई जल मीनार भी सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। कई गांवों में आबादी सैकड़ों में है, लेकिन पानी के लिए मात्र दो-तीन चापाकल ही उपलब्ध हैं। कुछ जगहों पर तो एक भी चापाकल नहीं है, जिससे लोगों को दूर-दूर तक पानी के लिए जाना पड़ता है।

हालांकि, जिले में जलापूर्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन ऊंचाई और दूरी के कारण कई इलाकों तक इनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। इसके अलावा, जल संरक्षण के उपायों की कमी भी इस संकट की एक बड़ी वजह बन रही है। निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का अभाव है, जिससे बारिश का पानी बहकर बर्बाद हो जाता है और भूजल स्तर को रिचार्ज नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते जल संरक्षण और मरम्मत कार्यों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले महीनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। लोगों को पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, सरायकेला में उभरता यह जल संकट प्रशासन और जनता दोनों के लिए एक चेतावनी है। अब जरूरत है ठोस कदम उठाने की, ताकि हालात को समय रहते संभाला जा सके और लोगों को राहत मिल सके।

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