सोशल संवाद/डेस्क: बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के खिलाफ ढाका के नेशनल प्रेस क्लब के सामने हिंदू संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों ने विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने यह भी बताया कि सिर्फ धार्मिक पहचान की वजह से अल्पसंख्यकों को परेशान किया जा रहा है। हिंदुओं को कलावा पहनने पर शक की नजर से देखा जा रहा है और उन्हें विदेशी एजेंट तक कहा जा रहा है। ऐसे माहौल में अल्पसंख्यक डर में जी रहे हैं।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश में हालात लगातार खराब हो रहे हैं। उनका दावा है कि इस साल जनवरी से अब तक 50 से ज्यादा गैर-मुस्लिमों की हत्या हो चुकी है और कई लोगों पर ईशनिंदा के झूठे मामले दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि दिसंबर, जिसे पाकिस्तान के खिलाफ जीत और गर्व का महीना माना जाता है, उसी महीने में अब तक 5 अल्पसंख्यकों की जान जा चुकी है।
लोग बोले- दीपू पर झूठा आरोप लगाकर हत्या की
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि दीपू निर्दोष था। उस पर झूठा आरोप लगाया गया कि उसने ईशनिंदा की है। इसके बाद कट्टरपंथियों ने उसे बुरी तरह पीटा, पेड़ से लटका दिया और फिर जिंदा जला दिया। दीपू की हत्या सिर्फ एक इंसान की हत्या नहीं है, बल्कि पूरे अल्पसंख्यक समुदाय के लिए डर का संदेश है। यह घटना पूरे देश में बढ़ रही धार्मिक हिंसा की सच्चाई दिखाती है।
लोगों ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद न तो सरकार की ओर से कोई ठोस बयान आया और न ही किसी बड़े नेता ने खुलकर इसकी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया ने भी इस मामले को उतनी जगह नहीं दी, जितनी मिलनी चाहिए थी।
भारत में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन
भारत की राजधानी नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई-कमीशन के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। यह प्रदर्शन बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में किया गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि यह प्रदर्शन बेहद छोटा और शांतिपूर्ण था। इससे बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था।
उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर बांग्लादेश के कुछ मीडिया संस्थानों में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। हकीकत यह है कि प्रदर्शन में सिर्फ 20 से 25 युवा शामिल थे। बांग्लादेश ने भारत के इस बयान को खारिज करते हुए कहा है कि स्थिति इससे कहीं ज्यादा गंभीर थी। ढाका ने कहा कि इस घटना को भ्रामक प्रचार कहना ठीक नहीं है।










