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West Singhbhum Crime: अंधविश्वास की आग में झुलसा परिवार, मां-बेटे की दर्दनाक मौत

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज में अब भी मौजूद अंधविश्वास की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के एक गांव में कथित तौर पर ‘डायन’ होने के शक में महिला और उसके मासूम बेटे को जिंदा जला दिया गया। इस वारदात में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि महिला का पति गंभीर रूप से झुलस गया और अस्पताल में उसका इलाज जारी है।

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आधी रात को दिया वारदात को अंजाम

पुलिस के मुताबिक, गांव में पिछले कुछ दिनों से बीमारियों और मवेशियों की मौत को लेकर अफवाहें फैल रही थीं। कुछ लोगों ने इसका जिम्मेदार महिला को ठहराया और उसे डायन घोषित कर दिया। आरोप है कि मंगलवार देर रात करीब दर्जनभर लोग हथियार और पेट्रोल लेकर पीड़ित के घर पहुंचे। परिवार के सोते समय घर में घुसकर पेट्रोल छिड़का गया और आग लगा दी गई। आग इतनी तेजी से फैली कि महिला और उसका बेटा बाहर निकल ही नहीं सके।

12 आरोपियों ने किया आत्मसमर्पण

घटना के बाद बुधवार को 12 ग्रामीण खुद थाने पहुंचे और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ जारी है। पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास और डायन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। प्रशासन ने साफ किया है कि अंधविश्वास के नाम पर हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

इलाके में तनाव, पुलिस बल तैनात

West Singhbhum Crime की इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर गांव और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की मदद से घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया जा सके।

डायन प्रथा पर फिर उठे सवाल

झारखंड के कई इलाकों में डायन प्रथा से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। सरकार ने इस कुप्रथा को रोकने के लिए कानून बनाए हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और सामाजिक डर के कारण ऐसी घटनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास अब भी गहरी जड़ें जमाए हुए है। जरूरत है कि प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ जनजागरूकता अभियान भी चलाए जाएं।

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