सोशल संवाद/डेस्क : जब भी आप मेडिकल स्टोर से दवा खरीदते हैं, तो आपने अक्सर देखा होगा कि दवाओं के पत्ते (Medicine Strip) पर लाल, नीली, हरी या काली रंग की लाइन बनी होती है। अधिकतर लोग इसे सिर्फ डिजाइन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ये रंगीन लाइनें आपकी सेहत से जुड़ी बेहद अहम जानकारी देती हैं। गलत दवा का सेवन गंभीर साइड इफेक्ट्स और जानलेवा जोखिम तक पैदा कर सकता है। ऐसे में दवा खरीदने से पहले इन लाइनों का मतलब जानना बेहद जरूरी है।
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दवा के पत्ते पर लाल लाइन का मतलब क्या होता है?
अगर किसी दवा के पत्ते पर लाल रंग की सीधी लाइन बनी होती है, तो इसका मतलब है कि यह दवा सिर्फ डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही ली जा सकती है। इन्हें Schedule H या H1 दवाएं कहा जाता है। इन दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के खाना खतरनाक हो सकता है। लाल लाइन फार्मासिस्ट के लिए भी चेतावनी होती है कि बिना पर्चे के यह दवा न बेची जाए।
किन दवाओं पर होती है लाल लाइन?
- एंटीबायोटिक दवाएं
- तेज दर्द निवारक
- मानसिक रोगों से जुड़ी दवाएं
- हार्मोन से संबंधित दवाएं
गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ती है, जिससे भविष्य में दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।
दवा के पत्ते पर नीली लाइन का मतलब
अगर दवा के पत्ते पर नीली रंग की लाइन बनी है, तो यह संकेत करता है कि यह दवा Schedule G श्रेणी में आती है।
ऐसी दवाएं:
- मेडिकल सुपरविजन में ली जाती हैं
- लंबे समय तक मॉनिटरिंग की जरूरत होती है
- खुद से लेना सुरक्षित नहीं होता
डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं का सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
दवा के पत्ते पर हरी लाइन का मतलब
हरी लाइन वाली दवाएं आमतौर पर OTC (Over The Counter) होती हैं।
इन दवाओं को सामान्य तौर पर बिना पर्चे के खरीदा जा सकता है।
उदाहरण:
- सिरदर्द की हल्की दवाएं
- बुखार की सामान्य गोलियां
- सर्दी-खांसी की दवाएं
हालांकि, इनका भी जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
दवा के पत्ते पर काली लाइन का मतलब
अगर किसी दवा पर काली लाइन बनी है, तो यह एक गंभीर चेतावनी संकेत है।
इसका मतलब है कि उस दवा से गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा हो सकता है।
ऐसी दवाओं को:
- डॉक्टर की सख्त निगरानी में लेना चाहिए
- बिना सलाह बिल्कुल नहीं लेना चाहिए
रंगीन लाइन क्यों जरूरी है?
भारत में दवाओं पर रंगीन लाइनें इसलिए बनाई जाती हैं ताकि:
- मरीज को दवा की श्रेणी समझ आ सके
- फार्मासिस्ट नियमों का पालन करें
- दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके
यह एक तरह से सेफ्टी इंडिकेटर होता है, जो आपकी सेहत की रक्षा करता है।
दवा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
- दवा के पत्ते पर बनी लाइन जरूर देखें
- लाल या नीली लाइन वाली दवा बिना डॉक्टर के न लें
- एंटीबायोटिक खुद से न खाएं
- दवा की एक्सपायरी डेट जांचें
- किसी भी साइड इफेक्ट पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
दवा के पत्ते पर बनी लाल, नीली, हरी या काली लाइन सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि आपकी सेहत से जुड़ा अहम संदेश होती है। अगली बार जब भी दवा खरीदें, इन लाइनों का मतलब जरूर समझें। सही जानकारी आपको गलत इलाज और गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।










