सोशल संवाद/डेस्क: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पहुंचने पर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद दीपके के पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो के जरिए अजिंक्य शिंदे को आंदोलन आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई।
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कौन हैं अजिंक्य शिंदे?
अजिंक्य शिंदे महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और CJP में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की भूमिका निभाते हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह 35 वर्षीय कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट हैं। उन्होंने पुणे की एक अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनी में काम किया था। बाद में वह आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े और पार्टी की महाराष्ट्र टीम में सोशल मीडिया समन्वयक के रूप में भी काम किया।
शिंदे CJP की सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने से जुड़ी ‘School Thik Karo’ मुहिम से भी जुड़े रहे हैं। अभिजीत दीपके की अनुपस्थिति में आंदोलन का नेतृत्व मिलने के बाद वह पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए हैं।
अभिजीत दीपके ने क्यों सौंपी आंदोलन की जिम्मेदारी?
CJP ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची से जुड़े कथित मुद्दों को लेकर प्रदर्शन की योजना बनाई थी। दीपके ने आशंका जताते हुए पहले ही एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें कहा गया कि अगर वह, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में लिए जाते हैं, तो अजिंक्य शिंदे आंदोलन की कमान संभालेंगे।
वीडियो में दीपके ने समर्थकों से शिंदे के नेतृत्व का अनुसरण करने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की अपील की। पार्टी ने यह वीडियो नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया।
‘हमने आधी लड़ाई जीत ली है’ : अजिंक्य शिंदे
नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलने के बाद अजिंक्य शिंदे ने सरकार पर प्रदर्शन को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने समर्थकों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की और कहा कि यदि पुलिस उन्हें रास्ते में रोकती है, तो वे उसी स्थान पर अपना विरोध दर्ज कराएं।
शिंदे ने दावा किया कि आंदोलन को दबाने के लिए की जा रही कार्रवाई सरकार की घबराहट का संकेत है। ये उनके अपने राजनीतिक आरोप और दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है CJP की प्रमुख मांग?
कॉकरोच जनता पार्टी ने निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची से संबंधित मामलों में पारदर्शिता शामिल है।
इन आरोपों और मांगों के बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से पहले नेताओं को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई को लेकर CJP ने विरोध जताया। प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद भी सामने आया।
अब आंदोलन की अगली रणनीति क्या है?
अजिंक्य शिंदे ने पार्टी नेताओं की अनुपस्थिति में समर्थकों को एकजुट रहने और प्रदर्शन जारी रखने का संदेश दिया। हालांकि, 11 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को बाद में हिरासत से रिहा कर दिया गया। CJP ने इसके बाद जंतर-मंतर पर आगे के प्रदर्शन का आह्वान भी किया।
इस घटनाक्रम ने अजिंक्य शिंदे को CJP आंदोलन के प्रमुख चेहरों में ला दिया है। अब उनकी भूमिका पार्टी की आगे की रणनीति और प्रदर्शन के संचालन में महत्वपूर्ण हो सकती है।











