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स्लो इंटरनेट से मिलेगी राहत, भारत में Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 को हरी झंडी

By Tamishree Mukherjee

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Wi-Fi 6E and Wi-Fi 7 benefits in India

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सोशल संवाद / डेस्क : भारत में इंटरनेट सेवाओं को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने तेज इंटरनेट तकनीक की दिशा में अहम कदम उठाते हुए Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही 6 GHz स्पेक्ट्रम के 500 MHz हिस्से को डीलाइसेंस कर दिया गया है, जिससे देश में वाई-फाई की रफ्तार और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

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DoT की अधिसूचना जारी

दूरसंचार विभाग (DoT) ने 6 GHz बैंड के निचले हिस्से को डीलाइसेंस करने की अधिसूचना जारी की है। इस फैसले के तहत अब हाई-स्पीड Wi-Fi तकनीक का उपयोग बिना किसी लाइसेंस फीस के किया जा सकेगा। इससे घरों, दफ्तरों और पब्लिक प्लेसेज़ में इंटरनेट का अनुभव पहले से कहीं बेहतर होगा।

स्लो Wi-Fi से मिलेगी राहत

फिलहाल भारत में ज्यादातर वाई-फाई नेटवर्क 2.4 GHz और 5 GHz बैंड पर आधारित हैं, जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में धीमे हो जाते हैं।
6 GHz बैंड के खुलने से यूजर्स को—

  • ज्यादा स्पीड
  • कम लैग
  • बेहतर नेटवर्क स्टेबिलिटी

जैसे फायदे मिलेंगे। ऑनलाइन गेमिंग, 4K वीडियो स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉलिंग का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।

इनडोर और आउटडोर इस्तेमाल को लेकर नियम तय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि

  • 6 GHz स्पेक्ट्रम का उपयोग लो-पावर इनडोर सिस्टम के लिए किया जाएगा
  • अत्यंत कम पावर वाले आउटडोर सिस्टम को भी सीमित अनुमति होगी
  • स्पेक्ट्रम को शेयर्ड आधार पर रखा गया है, जिससे अन्य सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए

हालांकि 6 GHz बैंड का ऊपरी हिस्सा (6425–7125 MHz) फिलहाल मोबाइल सेवाओं जैसे 5G और भविष्य की 6G तकनीक के लिए सुरक्षित रखा गया है।

स्पेक्ट्रम को लेकर टेक कंपनियों में मतभेद

6 GHz स्पेक्ट्रम को लेकर टेक इंडस्ट्री में लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। एक तरफ Apple, Amazon, Meta, Cisco और Intel जैसी वैश्विक कंपनियां पूरे 1200 MHz बैंड को वाई-फाई के लिए फ्री करने की मांग कर रही थीं। वहीं दूसरी ओर Reliance Jio सहित भारतीय टेलीकॉम कंपनियों का कहना था कि पूरे स्पेक्ट्रम की नीलामी होनी चाहिए।

सरकार ने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाते हुए 500 MHz स्पेक्ट्रम वाई-फाई के लिए डीलाइसेंस करने का फैसला किया है।

डिजिटल इंडिया को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला

  • डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती देगा
  • स्मार्ट होम, IoT और AI तकनीकों को बढ़ावा देगा
  • स्टार्टअप्स और टेक इंडस्ट्री के लिए नए अवसर खोलेगा
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