सोशल संवाद/डेस्क : दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह की अध्यक्षता में दिल्ली सचिवालय में SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना के अंतर्गत कार्य कर रही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न लोगों के पुनर्वास, आजीविका से जोड़ने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करना था।

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बैठक के दौरान विभिन्न NGOs ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों की विस्तृत प्रस्तुति दी। संस्थाओं ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर सैकड़ों लोगों से संपर्क किया, काउंसलिंग की और कई लोगों को भिक्षावृत्ति से बाहर निकालकर पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाया। कई लाभार्थियों को शेल्टर होम में स्थान दिलाया गया तथा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए गए।
प्रस्तुतियों में यह भी बताया गया कि लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जिसमें आधार कार्ड बनवाना, बैंक खाते खुलवाना, बीमा योजनाओं से जोड़ना, नगर निगम के माध्यम से वेंडर पंजीकरण कराना और राशन कार्ड के लिए आवेदन करना शामिल है। इसके साथ ही बच्चों को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में दाखिला दिलाने तथा महिलाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण प्रयास भी किए जा रहे हैं।
कुछ संस्थाओं ने अपने कार्यों की सफलता के उदाहरण भी प्रस्तुत किए, जिनमें बताया गया कि किस प्रकार भिक्षावृत्ति में संलग्न लोगों को काउंसलिंग, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया। कई लाभार्थी अब छोटे-छोटे व्यवसाय या स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आय अर्जित कर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
इस अवसर पर मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि SMILE योजना सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक समस्या को समाप्त करना और बेसहारा लोगों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार द्वारा NGOs को दिए जाने वाले संसाधनों और सहयोग के साथ पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी संस्थाएँ पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करें ताकि वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुँच सके।
उन्होंने कहा कि सरकार ने NGOs को विश्वास के साथ जिम्मेदारी सौंपी है और यह अपेक्षा की जाती है कि वे जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की नियमित समीक्षा और सत्यापन किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों द्वारा अचानक निरीक्षण भी किया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी संस्था को केवल औपचारिक रूप से जोड़ना नहीं है, बल्कि वास्तविक रूप से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएँ अच्छा कार्य करेंगी उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा और उनके प्रयासों को सम्मान भी दिया जाएगा।
उन्होंने NGOs से यह भी अपेक्षा की कि वे अपने कार्यों की मासिक रिपोर्टिंग करें और अपने द्वारा किए गए पुनर्वास के मामलों तथा सफलता की कहानियों को नियमित रूप से साझा करें। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से नोडल अधिकारी समय-समय पर इन कार्यों की समीक्षा करेंगे ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुँच सके।
रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि भिक्षावृत्ति केवल एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि देश की छवि से भी जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि जब कोई विदेशी पर्यटक भारत आता है और सड़कों पर भिक्षावृत्ति के दृश्य देखता है तो इससे देश की छवि प्रभावित होती है। इसलिए इस समस्या का समाधान करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि समाज के इस वर्ग को भी सम्मानजनक जीवन और बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें।
बैठक के दौरान कई संस्थाओं ने अपने सर्वेक्षण के आंकड़े प्रस्तुत किए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की पहचान, काउंसलिंग और पुनर्वास के उदाहरण शामिल थे। कुछ संस्थाओं ने लाभार्थियों की पहले और अब की स्थिति को प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार सरकारी सहयोग और सामाजिक प्रयासों के माध्यम से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। इस अवसर पर पुनर्वासित बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स भी मंत्री को भेंट की गईं।
मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने सभी संस्थाओं से आह्वान किया कि वे इस अभियान को केवल एक परियोजना के रूप में न देखें, बल्कि इसे समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन देने के एक बड़े मिशन के रूप में आगे बढ़ाएँ।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल भिक्षावृत्ति को कम करना नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही दिल्ली को भिक्षामुक्त और अधिक संवेदनशील समाज बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।









