सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड के सिमडेगा जिले से खेती के क्षेत्र में एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां के एक किसान ने जैविक खेती के जरिए हल्दी उत्पादन में नया इतिहास रच दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक ही पौधे से करीब 15 किलोग्राम हल्दी का उत्पादन कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस अनोखी सफलता के कारण उनका नाम एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है, जिससे न केवल उनका बल्कि पूरे राज्य का मान बढ़ा है।
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किसान की इस उपलब्धि के पीछे करीब एक वर्ष की मेहनत, प्रयोग और धैर्य शामिल है। उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर प्राकृतिक तरीके अपनाए और मिट्टी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। परिणामस्वरूप हल्दी का पौधा सामान्य से कई गुना अधिक विकसित हुआ और असाधारण उत्पादन मिला। स्थानीय स्तर पर आयोजित कृषि प्रदर्शनी में जब इस हल्दी को प्रदर्शित किया गया, तो विशेषज्ञों और किसानों ने इसे काफी सराहा। इस उपलब्धि के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।
इस नई हल्दी किस्म की खासियत इसकी बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन क्षमता बताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। यह सफलता यह भी दर्शाती है कि वैज्ञानिक सोच और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
किसान ने इस उपलब्धि के लिए किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने जीवामृत, कंपोस्ट खाद और प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों की मदद से मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाया। इससे पौधे की जड़ों को पर्याप्त पोषण मिला और उसका विकास तेजी से हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है बल्कि इससे उत्पाद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
इस प्रयोग में स्थानीय स्तर पर अन्य युवाओं का भी सहयोग मिला, जिन्होंने खेती में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि यदि युवा वर्ग खेती से जुड़े और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करे तो कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की उपलब्धियां किसानों के लिए प्रेरणा का काम करती हैं। इससे प्राकृतिक खेती के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा और अधिक किसान रासायनिक खेती से हटकर पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही, इससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी और लंबे समय तक टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा।
झारखंड के इस किसान की सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, सही तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के समझदारीपूर्ण उपयोग से खेती में चमत्कारिक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। आने वाले समय में यदि इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाए तो देश में हल्दी उत्पादन और जैविक खेती को नई दिशा मिल सकती है।










