सोशल संवाद/जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में गुरुवार को 13वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में झारखंड के राज्यपाल Santosh Kumar Gangwar मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से आए उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तकरघा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कारीगरों को सम्मानित किया।
यह भी पढे : Price Hike रसोई का बजट फिर बिगड़ा, 6 महीने में तेल, दाल, आटा और चीनी समेत कई जरूरी सामान हुए महंगे
कार्यक्रम का आयोजन वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन की ओर से किया गया। इसमें झारखंड सहित कई राज्यों से बुनकर, शिल्पकार, हस्तकरघा विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस मौके पर हस्तकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जहां अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक बुनाई और हस्तनिर्मित वस्त्रों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि हस्तकरघा केवल कपड़ा बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और विरासत की पहचान है। उन्होंने कहा कि हर बुना हुआ कपड़ा हमारे इतिहास और लोककला की कहानी कहता है। बुनकर देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए सरकार इस क्षेत्र को लगातार बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस का उद्देश्य बुनकरों की मेहनत को सम्मान देना और नई पीढ़ी को भारतीय हस्तकरघा परंपरा से जोड़ना है। यह दिन देशभर के लाखों बुनकर परिवारों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा के वरिष्ठ नेता Anand Sahu ने की। उन्होंने कहा कि पहली बार जमशेदपुर में राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस का इतना बड़ा आयोजन हुआ है। देश के कई राज्यों से आए बुनकरों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को खास बना दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हस्तकरघा उद्योग को नई पहचान देने के साथ-साथ बुनकरों को बेहतर बाजार और नए अवसर उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित होंगे।
समारोह में कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और विभिन्न संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे।









