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14वीं JPSC परीक्षा फर्जीवाड़ा: पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को जमानत नहीं, CID जांच जारी

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / डेस्क : 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े और अनियमितता से जुड़े मामले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को फिलहाल अदालत से राहत नहीं मिली है। CID की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। जमानत नहीं मिलने के बाद उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।

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इससे पहले बुधवार को अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए एल खियांग्ते को जमानत देने से इनकार कर दिया।

बचाव पक्ष ने कहा- ठोस सबूत नहीं

सुनवाई के दौरान एल खियांग्ते की ओर से अधिवक्ता ने उनकी जमानत के पक्ष में दलील पेश की। बचाव पक्ष का कहना था कि उनके खिलाफ ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे आपराधिक साजिश में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका साबित हो सके।

अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि CID की ओर से की गई छापेमारी के दौरान कोई ऐसा आपत्तिजनक दस्तावेज या सामग्री बरामद नहीं हुई, जो उनके मुवक्किल के खिलाफ मामले को मजबूत करती हो। बचाव पक्ष ने कहा कि महज आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है और उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।

CID ने बताई एल खियांग्ते की कथित भूमिका

वहीं, जांच एजेंसी CID ने अदालत के सामने एल खियांग्ते की भूमिका को गंभीर बताया। जांच एजेंसी के मुताबिक, ब्लैकलिस्टेड निजी कंपनी ट्रिपल डी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को JPSC की परीक्षाओं के आयोजन से जुड़ा काम दिलाने में एल खियांग्ते की कथित अहम भूमिका रही।

CID ने जांच के दौरान उनके खिलाफ भारी कमीशन लेने के आरोपों की भी जानकारी अदालत को दी। एजेंसी का दावा है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी प्रक्रिया में उनकी भूमिका और निजी कंपनी से संबंधित गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण है।

साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश का भी आरोप

CID की ओर से अदालत में यह भी बताया गया कि पूछताछ के दौरान साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश से जुड़े तथ्य जांच में सामने आए थे। जांच एजेंसी ने इन्हीं पहलुओं को गंभीर मानते हुए एल खियांग्ते की गिरफ्तारी की थी। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। अब जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनकी हिरासत फिलहाल जारी रहेगी।

JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में जारी है जांच

14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ा यह मामला भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और परीक्षा संचालन में निजी एजेंसियों की भूमिका की जांच से जुड़ा है। CID इस पूरे प्रकरण में JPSC के पूर्व अधिकारियों, संबंधित निजी कंपनी के प्रतिनिधियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी प्रक्रिया में नियमों का कथित उल्लंघन कैसे हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

एल खियांग्ते को फिलहाल जेल में रहना होगा

अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद एल खियांग्ते को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। वहीं, CID मामले की आगे की जांच जारी रखेगी और कथित परीक्षा अनियमितता से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े इस मामले में पूर्व अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज होना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

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