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37वां अंतर्राष्ट्रीय संताली लेखक सम्मेलन एवं साहित्य महोत्सव

By Tamishree Mukherjee

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37वां अंतर्राष्ट्रीय संताली लेखक सम्मेलन एवं साहित्य महोत्सव
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सोशल संवाद / जमशेदपुर : 27 दिसंबर 2024 को युवाओं का सम्मेलन से कार्यक्रम प्रारम्भ होगा। अखिल भारतीय संताली लेखक संघ (AISWA) ने 27 और 29 दिसंबर 2024 को दिशोम जाहेर, करनडीह, जमशेदपुर में 37वें अंतर्राष्ट्रीय संताली लेखक सम्मेलन एवं साहित्य महोत्सव का आयोजन किया जाना है । 3 दिवसीय यह कार्यक्रम संताली साहित्य एवं संस्कृति का एक असाधारण उत्सव है , जिसमें भारत और विदेश के प्रख्यात लेखकों, विद्वानों और गणमान्य व्यक्तियों भाग लेंगे।

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महोत्सव की शुरुआत 28 दिसंबर को वार्षिक आम बैठक (AGM) के साथ होगी, जिसकी अध्यक्षता AISWA के अध्यक्ष लक्ष्मण किस्कू करेंगे इसमें संघ की वार्षिक रिपोर्ट, वित्तीय विवरण, समिति चुनाव और भविष्य की पहलों पर मुख्य विचार-विमर्श किया जाना है। औपचारिक उद्घाटन दोपहर में मुख्य अतिथि के रूप में हेमंत सोरेन, माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड, विशिष्ट अतिथि: दीपक बिरुआ और रामदास सोरेन, माननीय मंत्री, झारखंड, पद्मश्री खेरवाल सरेन, सांसद, विधायक और सांस्कृतिक नेताओं सहित अन्य सम्मानित गणमान्य व्यक्ति। उद्घाटन सत्र में तेजी से वैश्वीकरण की दुनिया में स्वदेशी साहित्य और संस्कृति को संरक्षित करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

सम्मेलन में कई विषयगत सत्र शामिल थे:

1. संताली भाषा और साहित्य – संताली साहित्य के विकास, ओल चिकी लिपि, डिजिटल प्लेटफॉर्म और महिला लेखकों के योगदान पर चर्चा होगी।

2. समकालीन रुझान और चुनौतियाँ – वैश्वीकरण के प्रभाव, उभरते लेखकों के लिए सर्वोत्तम अभ्यास और आदिवासी शिक्षा में साहित्य की भूमिका पर चर्चा किया जाना है।

3. संताली साहित्य में AISWA का योगदान – राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर AISWA के वकालत प्रयासों और सहयोग पर प्रकाश डाला गया।

दूसरे दिन “मेरे दृष्टिकोण से: लेखक और उनकी पुस्तक” और “साहित्य और समाज” जैसे अनूठे सत्र शामिल हैं , जिसमें आदिवासी अधिकारों, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान पर साहित्य के प्रभाव की खोज की गई।

कार्यक्रम का समापन 2024 के लिए AISWA पुरस्कार विजेताओं के सम्मान के साथ किया जाना है, जिसमें संताली साहित्य और संस्कृति में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए चुंडा सोरेन ‘सिपाही’ को प्रदान किया गया प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2024 भी शामिल है।

यह उत्सव भावी पीढ़ियों के लिए संताली विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के सामूहिक प्रयास का प्रमाण है।

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