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झारखंड में 41 शराब दुकानें होंगी सरेंडर, 1302 दुकानों ने जमा की लाइसेंस फीस, फिर होगी लॉटरी प्रक्रिया

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों के नवीनीकरण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। राज्य के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के अनुसार कुल 1343 स्वीकृत शराब दुकानों में से 1302 दुकानों के संचालकों ने समय सीमा के भीतर लाइसेंस शुल्क जमा कर दिया है। वहीं 41 दुकानों के लिए किसी संचालक ने शुल्क जमा नहीं किया, जिसके चलते इन दुकानों को सरेंडर माना जाएगा। राज्य सरकार अब इन दुकानों के आवंटन के लिए दोबारा लॉटरी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है।

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जानकारी के मुताबिक जिन दुकानों का आवंटन लॉटरी के माध्यम से नहीं हो पाएगा, उनका संचालन झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा सकता है। विभाग ने लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि सात फरवरी तय की थी। नगर निगम क्षेत्र की दुकानों के लिए दो लाख रुपये और ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों के लिए एक लाख रुपये का शुल्क निर्धारित था। यह राशि नॉन-रिफंडेबल है, इसलिए जिन संचालकों ने फीस जमा की है, वे अगले वित्तीय वर्ष में भी दुकान संचालन के पात्र माने जाएंगे।

उत्पाद विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि लाइसेंस शुल्क जमा करने वाले दुकानदारों को सात मार्च तक साढ़े बारह प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा तक मार्जिन मनी जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित दुकानों को भी सरेंडर माना जाएगा, भले ही उन्होंने लाइसेंस शुल्क जमा किया हो। ऐसे मामलों में जमा शुल्क जब्त कर लिया जाएगा।

राज्य में वर्तमान समय में देसी शराब की 159 और कंपोजिट शराब की 1184 दुकानें स्वीकृत हैं, जिनका संचालन निजी लाइसेंसधारकों द्वारा किया जाता है। इस बार कई दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क जमा करने में हिचक दिखाई थी, क्योंकि बढ़ते कर और कम बिक्री के कारण मुनाफा घटने की शिकायत सामने आ रही थी। हालांकि आने वाले होली और गर्मी के मौसम में बिक्री बढ़ने की संभावना को देखते हुए अधिकांश संचालकों ने लाइसेंस नवीनीकरण का फैसला लिया।

शराब दुकानदार संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में बिक्री अपेक्षाकृत कम रही, जिससे कई संचालकों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, त्योहारों और गर्मी के मौसम में बीयर और अन्य पेय पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद ने संचालकों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि संघ ने यह भी संकेत दिया है कि यदि आगामी महीनों में बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होती, तो कुछ संचालक मार्जिन मनी जमा करने से पीछे हट सकते हैं, जिससे सरेंडर दुकानों की संख्या बढ़ सकती है।

सरकार का मानना है कि नई लॉटरी प्रक्रिया से इच्छुक नए व्यवसायियों को मौका मिलेगा और शराब दुकानों का संचालन व्यवस्थित ढंग से जारी रहेगा। वहीं उत्पाद विभाग लगातार नियमों के पालन और राजस्व संग्रह को लेकर सख्त नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कितनी दुकानें वास्तव में सरेंडर होती हैं और कितनी का सफलतापूर्वक नवीनीकरण हो पाता है।

कुल मिलाकर झारखंड में शराब दुकानों के लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया राज्य के राजस्व और व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि नई नीति और समयबद्ध प्रक्रियाओं से राज्य की आय में बढ़ोतरी होगी और कारोबार भी सुचारु रूप से चलता रहेगा।

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