Responsive Full Width Slider
Advertisement 1
Advertisement 2

 रामदास सोरेन का कैसा रहा राजनीतिक जीवन, झामुमो से इस्तीफा देकर निर्दलीय लड़े विधानसभा चुनाव

By Annu kumari

Published :

Follow
ramdas soren
Srinath Advertisement
Dayal Advertisement

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/ डेस्क: झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का राजनीति का जीवन भी काफी दिलचस्प रहा है, 44 साल तक वें राजनीति में रहे। उन्होने ग्राम प्रधान से कैबिनेट मंत्री तक का सफर किया। पूरे राजनीतिक जीवन में उनकी पहचान राजनेता के रूप में कम, आंदोलनकारी और समाजसेवी के रूप में ज्यादा रही, 4 दशक से अधिक लंबे समय से राजनीति में रहे, 62 साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

यह भी पढ़ें : शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन पर एक दिन का राजकीय शोक

Sunrise Enclave
ASL Motors and Dilip Kia

 शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन कभी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ गये थे. 35 हजार वोट लाकर उन्होंने साबित कर दिया था कि उनमें विधायक बनने का माद्दा है. बात वर्ष 2005 की है. झामुमो और कांग्रेस का गठबंधन था. घाटशिला सीट कांग्रेस के खाते में गयी थी. रामदास चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिला. झामुमो जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देकर वह निर्दलीय चुनाव लड़ गये थे. इसके बाद 3 बार विधायक बने.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के बड़े नेता रामदास सोरेन सरल, सहज और सामाजिक व्यक्ति थे. 1980 में झामुमो से जुड़े. अपने 44 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने ग्राम प्रधान से कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया. उनका राजनीतिक जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2025 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

  • रामदास सोरेन पहली बार ढाई माह के लिए मंत्री बने थे, दूसरी बार बने कैबिनेट मंत्री
  • सहजता, सरलता और सामाजिक सरोकार से आम से खास तक सभी के चहेते बने

रामदास सोरेन ने एक राजनेता से कहीं ज्यादा समाजसेवी और आंदोलनकारी के रूप में अपनी छवि बनायी थी. झारखंड आंदोलन के दौरान शिबू सोरेन, चंपाई सोरेन, सुनील महतो, सुधीर महतो, अर्जुन मुंडा के साथ उन्होंने काफी संघर्ष किया. उनके नाम का बॉडी वारंट तक निकाला गया था.

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

Social Samvad Creator