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महाशिवरात्रि 2026: पहाड़ी मंदिर से निकलेगी भव्य शिव बारात, सीएम करेंगे शुभारंभ

February 14, 2026 1:51 PM
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सोशल संवाद/डेस्क : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची में इस बार भव्य शिव बारात का आयोजन किया जा रहा है। ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर से रविवार दोपहर तीन बजे बारात निकलेगी। आयोजन समिति के अनुसार इस बार धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। शहर के विभिन्न इलाकों में तैयारियां जोरों पर हैं और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

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मुख्यमंत्री हरी झंडी दिखाकर करेंगे शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दीप प्रज्वलित कर करेंगे और शिव बारात को हरी झंडी दिखाएंगे। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और धार्मिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहेंगे। आयोजनकर्ताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम राज्य की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक परंपराओं को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

भूत-प्रेतों की टोली और झांकियां बनेंगी आकर्षण

शिव बारात में भगवान शिव कर्पूरगौरं स्वरूप में नजर आएंगे और उनके साथ भूत-प्रेतों की टोली तांडव नृत्य प्रस्तुत करेगी। राम-लक्ष्मण-सीता, राधा-कृष्ण और मां दुर्गा की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। 51 माताएं दूल्हे के रूप में सजे भोलेनाथ की आरती करेंगी और पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया जाएगा। इससे पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूब जाएगा।

तय रूट से गुजरेगी भव्य बारात

बारात पहाड़ी मंदिर मुख्य द्वार से निकलकर शनि मंदिर अपर बाजार, शहीद चौक, फिरायालाल चौक, गांधी चौक, महावीर चौक और रातू रोड होते हुए पिस्का मोड़ स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। यहां भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीकात्मक विवाह संस्कार संपन्न किया जाएगा। प्रशासन की ओर से ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष योजना बनाई गई है।

इको-फ्रेंडली आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस वर्ष शिव बारात को पूरी तरह इको-फ्रेंडली बनाया गया है। देशभर से आए कलाकार शिव तांडव, छऊ नृत्य, भजन संध्या और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत करेंगे। अघोरियों का तांडव नृत्य और 21 बालिकाओं द्वारा काली तांडव विशेष आकर्षण रहेगा। आयोजन समिति के अनुसार करीब 20 से अधिक सजे-धजे वाहन और पांच रथ बारात की शोभा बढ़ाएंगे।

धार्मिक रस्मों से गूंजा मंदिर परिसर

महाशिवरात्रि से पहले मंदिरों में हल्दी, मेहंदी और मंगल गीतों के साथ पारंपरिक रस्में निभाई जा रही हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना और विशेष कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। आयोजकों ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस धार्मिक उत्सव को सफल बनाएं।

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