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पश्चिम बंगाल सरकार पर लगे आरोप – The Bengal Files की रिलीज़ पर रोक ने खड़ा किया बड़ा विवाद

By Muskan Thakur

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Allegations against West Bengal government – ​​The Bengal Files

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सोशल संवाद/डेस्क : बंगाल की राजनीति और समाज में इन दिनों एक फिल्म को लेकर भारी बहस छिड़ गई है। चर्चित फिल्म The Bengal Files को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से मंजूरी मिलने के बावजूद राज्य में स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं मिली। निर्माताओं और समर्थकों का कहना है कि सरकार राजनीतिक दबाव और संभावित हिंसा की आशंका का हवाला देकर फिल्म को जनता तक पहुँचने से रोक रही है।

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फिल्म The Bengal Files का दावा है कि यह 1946 के उस दौर को दिखाती है जब बंगाल में हिंदू समाज को बड़े पैमाने पर हिंसा और नरसंहार का सामना करना पड़ा था। फिल्म की कहानी को लेकर पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज थी और कई दर्शक इसे इतिहास के भूले-बिसरे अध्याय को सामने लाने की कोशिश के तौर पर देख रहे थे। लेकिन राज्य में इसे रिलीज़ की हरी झंडी न मिलने से विवाद और गहरा गया है।

निर्माताओं का आरोप है कि राज्य सरकार इस फिल्म पर सीधे-सीधे अनौपचारिक पाबंदी लगा रही है। उनका कहना है कि यह न केवल एक फिल्म को रोकने की कोशिश है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी हमला है। फिल्म के प्रोड्यूसर का कहना है, “जब CBFC ने फिल्म को प्रमाणित कर दिया, तब राज्य सरकार को इसे रोकने का अधिकार नहीं होना चाहिए। यह कदम दर्शाता है कि सरकार सच से डर रही है और इतिहास को छुपाने की कोशिश कर रही है।”

बताया जा रहा है कि हाल ही में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च कोलकाता में आयोजित किया गया था, लेकिन कार्यक्रम बीच में ही रुकवा दिया गया। आयोजकों का दावा है कि उन पर लगातार दबाव बनाया गया और माहौल खराब होने की चेतावनी दी गई। इससे पहले भी शहर के कुछ सिनेमाघरों को कथित तौर पर निर्देश दिए गए थे कि फिल्म की स्क्रीनिंग से बचें, अन्यथा सुरक्षा संबंधी खतरे खड़े हो सकते हैं।

वहीं, विदेशों में बसे बंगाली समुदाय ने इस फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। वहां दर्शकों ने कहा कि यह कहानी दुनिया के सामने आनी ही चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इतिहास से सबक ले सकें। लेकिन अपने ही राज्य में फिल्म का रास्ता रोक दिया जाना, कई सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला केवल एक फिल्म का नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सवाल है। क्या राज्य सरकार सेंसर बोर्ड से भी ऊपर हो सकती है? क्या जनता को यह तय करने का अधिकार नहीं कि वे फिल्म देखें या नहीं? इन सवालों ने बंगाल में एक नई बहस छेड़ दी है।

हालाँकि सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। लेकिन विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं। उनका कहना है कि यह ‘सच को दबाने की कोशिश’ है और इससे सरकार की असहजता साफ झलकती है।

फिलहाल, The Bengal Files बंगाल के सिनेमाघरों तक नहीं पहुँच पाई है। लेकिन इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कला और इतिहास को लेकर राजनीति किस तरह से दखल देती है। दर्शकों और निर्माताओं का कहना है कि सच को कितनी भी कोशिश कर छुपाया जाए, एक दिन वह सामने जरूर आएगा।

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