सोशल संवाद/डेस्क : पूज्य गुरुजी डॉ. चंद्रभानु सत्पथीजी शिरडी साईं बाबा से गहन रूप से जुड़े एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरु हैं। वे बाबा के श्रद्धा एवं सबूरी के संदेश का व्यापक प्रसार करते हुए पवित्रता, विनम्रता, आत्मसंयम तथा निःस्वार्थ सेवा के मूल्यों पर विशेष बल देते हैं। उनकी सरल, व्यावहारिक एवं प्रेरणादायी शिक्षाएँ आत्मिक उन्नति, नैतिक जीवन तथा ईश्वरीय इच्छा के प्रति समर्पण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

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शिक्षाविदों एवं प्रशासकों के प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे गुरुजी ने वर्ष 1972 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में उत्तर प्रदेश कैडर के अंतर्गत अपनी सेवा प्रारंभ की। उत्तर प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के उपरांत वे वर्ष 2008 में पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। अपने दीर्घ एवं उत्कृष्ट सेवाकाल के दौरान उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया, जिनमें पुलिस वीरता पदक (1985), दीर्घ एवं सराहनीय सेवा हेतु पुलिस पदक (1991) तथा विशिष्ट सेवा हेतु पुलिस पदक (1997) प्रमुख हैं।
अपने प्रशासनिक एवं व्यावसायिक दायित्वों से परे, पूज्य गुरुजी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित विद्वान, आध्यात्मिक चिंतक, लेखक, समाजसेवी, परोपकारी एवं मानवतावादी के रूप में विख्यात हैं। उनके योगदान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर समाज के सभी वर्गों धर्म, जाति, लिंग एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर मानव कल्याण को समर्पित हैं।
गुरुजी डॉ. सत्पथी को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है, जिनमें ‘श्री गोविंद नारायण सम्मान’ (2012), ‘श्री गुरु भागवत’ (2012) हेतु श्रीमती प्रतिभा पाटिल द्वारा प्रदत्त सम्मान, संगीत एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए ‘बाबा बैद्यनाथ संगीता रत्न’ (2011) तथा ‘दिव्य संगीता शिरोमणि’ (2011) सम्मिलित हैं। ओड़िया आध्यात्मिक साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘महापुरुष जगन्नाथ दास सम्मान’ (2011) से भी विभूषित किया गया।










