सोशल संवाद / डेस्क : WhatsApp की एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन और यूज़र प्राइवेसी को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मैसेजिंग ऐप की पैरेंट कंपनी Meta के खिलाफ अमेरिका में एक गंभीर मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि WhatsApp यूज़र्स की प्राइवेट चैट्स को लेकर किए गए दावे पूरी तरह सही नहीं हैं।

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क्या है पूरा मामला?
अमेरिका में दायर इस मुकदमे में Meta और WhatsApp पर आरोप है कि कंपनी यूज़र्स के निजी संदेशों को स्टोर, एनालाइज और जरूरत पड़ने पर एक्सेस कर सकती है। इस केस में ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के याचिकाकर्ता शामिल हैं। उनका दावा है कि WhatsApp के कर्मचारी भी कुछ परिस्थितियों में यूज़र चैट्स तक पहुंच बना सकते हैं। हालांकि Meta ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
Elon Musk ने WhatsApp को बताया असुरक्षित
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए टेस्ला और X (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने WhatsApp की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि WhatsApp सुरक्षित नहीं है और यूज़र्स को सावधान रहने की जरूरत है। मस्क ने लोगों से X के चैट फीचर का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी।
Telegram CEO Pavel Durov का तीखा बयान
वहीं Telegram के CEO और फाउंडर पावेल दुरोव ने WhatsApp को लेकर और भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो लोग 2026 में भी WhatsApp को सिक्योर मानते हैं, वे “ब्रेनडेड” हैं। दुरोव का दावा है कि Telegram की टीम ने WhatsApp के एनक्रिप्शन सिस्टम का विश्लेषण किया है, जिसमें कई सुरक्षा खामियां पाई गई हैं।
यूज़र्स के लिए क्या है जरूरी?
इस पूरे विवाद के बीच एक बार फिर डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी पर बहस तेज हो गई है। एक्सपर्ट्स की मानें तो यूज़र्स को किसी भी मैसेजिंग ऐप पर संवेदनशील जानकारी साझा करते समय सतर्क रहना चाहिए और प्राइवेसी पॉलिसी को समझना जरूरी है।










