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प्रयागराज विवाद पर नरमी के संकेत, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से माफी को तैयार मेला प्रशासन

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : Prayagraj Shankaracharya Controversy को लेकर अब सियासी और धार्मिक हलकों में सुलह की उम्मीदें बढ़ती दिख रही हैं। माघ मेले के दौरान उपजे विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अचानक प्रयागराज छोड़कर वाराणसी लौटने से प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। ताजा जानकारी के अनुसार, अब प्रयागराज मेला प्रशासन शंकराचार्य से औपचारिक रूप से माफी मांगने को तैयार है, ताकि यह मामला और न बढ़े।

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कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह विवाद 27 जनवरी को उस समय शुरू हुआ जब मौनी अमावस्या के पावन स्नान के लिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने रथ और पालकी के साथ संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनसे रथ से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया। लेकिन शंकराचार्य के समर्थक रथ को आगे ले जाने पर अड़े रहे।

इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। शंकराचार्य का आरोप है कि उन्हें संगम तक जाने से रोका गया, उनकी पालकी बीच रास्ते में रोक दी गई और पुलिस ने अनुचित व्यवहार किया। इससे आहत होकर उन्होंने माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का निर्णय लिया।

अचानक वाराणसी रवाना हुए शंकराचार्य

प्रशासन को उम्मीद थी कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा तक प्रयागराज में ही रुकेंगे और बातचीत के जरिए मामला सुलझ जाएगा। लेकिन 28 जनवरी को उनका अचानक वाराणसी लौट जाना प्रशासन के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इसके बाद हालात पूरी तरह बदल गए।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार के अनुसार, वाराणसी पहुंचने के बाद लखनऊ से दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और पूर्ण सम्मान के साथ प्रयागराज लौटने का आग्रह किया। हालांकि शंकराचार्य ने इसके लिए कुछ शर्तें रखीं।

शंकराचार्य की प्रमुख शर्तें

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि

  • विवाद के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित रूप से माफी मांगें
  • चारों शंकराचार्यों के लिए माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में स्पष्ट प्रोटोकॉल तय कर सार्वजनिक किया जाए

उनका कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत अपमान का नहीं, बल्कि परंपरा और धार्मिक मर्यादा से जुड़ा हुआ है।

प्रशासन का बदला रुख

वाराणसी रवाना होने के बाद प्रशासन को यह एहसास हुआ कि मामला गंभीर हो सकता है और धार्मिक भावनाओं पर इसका असर पड़ेगा। अब प्रयागराज मेला प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार बताया जा रहा है, ताकि माघ पूर्णिमा पर उनकी पारंपरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस बनेगी निर्णायक

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। माना जा रहा है कि इसी प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट होगा कि वे प्रशासन की पेशकश स्वीकार करेंगे या नहीं। फिलहाल शंकराचार्य का कहना है कि उनका स्नान कार्यक्रम वाराणसी में ही तय है, लेकिन शर्तें मानने पर प्रयाग लौटने की संभावना से इनकार भी नहीं किया गया है।

धार्मिक और प्रशासनिक संतुलन की चुनौती

यह पूरा मामला प्रशासन और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है। एक ओर सुरक्षा और व्यवस्था का सवाल है, तो दूसरी ओर सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताएं और सम्मान। अब देखना यह होगा कि प्रशासन शंकराचार्य की शर्तों को किस हद तक स्वीकार करता है।

आगे क्या?

अगर माफी और प्रोटोकॉल को लेकर सहमति बनती है, तो यह विवाद थम सकता है। लेकिन यदि समाधान नहीं निकला, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस को इस पूरे विवाद का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।

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