सोशल संवाद/डेस्क: जमशेदपुर के कई प्रतिष्ठित निजी स्कूल राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की जांच के दायरे में आ गए हैं। स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया में अनियमितता और शिक्षकों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी की शिकायतों पर आयोग ने झारखंड सरकार के शिक्षा सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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बताया जा रहा है कि लॉटरी आधारित एडमिशन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी को लेकर आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। शिकायत के आधार पर शहर के कई बड़े स्कूलों का नाम जांच से जोड़ा गया है, जिससे शिक्षा जगत में हलचल बढ़ गई है।
आयोग ने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी गंभीर चिंता जताई है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि कुछ संस्थानों में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं जिनके पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता या प्रशिक्षण नहीं है। साथ ही कर्मचारियों और शिक्षकों का पुलिस सत्यापन नहीं होने का मामला भी उठाया गया है, जिसे बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम माना जा रहा है।
NCPCR ने स्पष्ट किया है कि उसके पास दीवानी अदालत जैसी शक्तियां हैं और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर स्कूलों की मान्यता रद्द करने या आर्थिक दंड लगाने जैसी कार्रवाई संभव है। आयोग ने जिला स्तर पर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को भी देने को कहा है। इस कार्रवाई के बाद शहर के निजी स्कूल प्रबंधन में हलचल है और अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच की दिशा और परिणाम पर टिकी है।










