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बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना अधूरी, फंड की कमी से पेयजल संकट बरकरार

By Riya Kumari

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बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना अधूरी

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सोशल संवाद / डेस्क : सांसद बिद्युत बरण महतो ने लोकसभा के विगत शीतकालिन सत्र में दिनांक 01.12.2025 को नियम 377 के अधीन बागबेड़ा-गोविंदपुर ग्रामीण जलापूर्ती योजना का मामला उठाते हुए कहा था कि यह योजना वर्ष 2014-19 के दौरान केन्द्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से शुरू की गई थी। जिनमे से उस योजना का गोविंदपुर जलापूर्ती योजना का कार्य पूरा हो गया। जबकि बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ती योजना का हिस्सा अभी तक पूरा नहीं हुआ है जिसके कारण बागबेड़ा के ग्रामीण क्षेत्र में लोग पेयजल के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं एवं उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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सांसद महतो के लोकसभा में मामले के उठाये जाने के पश्चात केन्द्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने झारखण्ड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मुख्य अभियंता सह कार्यपालक निदेशक को पत्रांक II-11025/18/2025-JJM-III-DDWS,   दिनांक 10.12.2025 के माध्यम से जानकारी मांगी। केन्द्र सरकार को पे्रषित जवाब में मुख्य अभियंता सह कार्यपालक निदेशक ने बताया कि प्रारंभ में ये योजना नीर-निर्मल परियोजना के तहत 206.63 करोड़ रू0 की राशि से शुरू की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 237.21 करोड़ रू0  की गई। संबंधित एजेंसी ने 2019 में छोटा गोविंदपुर का कार्य पूर्ण कर दिया एवं बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ती योजना का 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया गया। तत्पश्चात संबंधित एजेंसी का एकरारनामा भंग कर दिया गया साथ ही नीर-निर्मल परियोजना 31.03.2020 को बंद हो गई।

तत्पश्चात बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ती योजना को जल जीवन मिशन योजना में शामिल किया गया जिसके लिए कुल 107.19 करोड़ रू0 की राशि की स्वीकृति प्रदान की गई। पुनः उत्तर में मुख्य अभियंता सह कार्यपालक निदेशक ने यह सूचित किया कि शेष कार्य का 60 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। वित्तिय वर्ष 2025-26 में केन्द्रांश मद एवं राज्यांश मद में कोई राशि उपलब्ध नहीं होनेे के कारण कार्य की प्रगति बाधित है। जल जीवन मिशन अन्तर्गत राशि के अभाव में निर्माण कार्य की प्रगति प्रभावित हो रही है।

राज्य सरकार के द्वारा पत्र प्राप्त होने पर जल शक्ति एवं रेलवे मंत्रालय भारत सरकार के राज्य मंत्री वी0 सोमन्ना ने सांसद बिद्युत बरण महतो को पत्र लिखकर अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। जिसमें कहा गया कि पेयजल राज्य सूची का मामला है और योजना स्वीकृति के उपरांत इसका कार्यान्वयन राज्य सरकार की जिम्मेवारी है। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत जलापूर्ती योजनाओं के लिए केन्द्र सरकार वित्तीय, नीतिगत एवं तकनिकी सहायता उपलब्ध कराती है। राज्य सरकार द्वारा प्रेषित प्रति संलग्न करते हुए कहा गया कि यह योजना जल जीवन मिशन के अन्तर्गत वर्ष 2021 में आया है एवं राज्य सरकार ने इंगित किया है कि राशि के अभाव में इस योजना की प्रगति बाधित है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन एक समयबद्ध कार्यक्रम है और चुंकि जल राज्य सरकार का विषय है। यह बात राज्य सरकार को कई बार पत्र के माध्यम से एवं समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया गया कि उक्त योजना में उपलब्ध राशि का उपयोग उसी अवधि में की जा सकती है और यदि कोई अतिरिक्त खर्च होने पर यह राज्य सरकार को अपने संसाधनों से पूरा करना होगा।

पत्र में यह भी लिखा गया है, जल जीवन मिशन की अवधि 2028 तक विस्तारित की गई है। साथ ही इस मिशन के अन्तर्गत गुणवत्ता युक्त एवं पाइपलाईन के द्वारा जन भागीदारी के माध्यम से नागरीकों को पेयजल की उपलब्धता को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि जल राज्य सरकार का मामला है। यह राज्य सरकार/केन्द्रशासित प्रदेश योजनाओं को अपने संसाधनों के माध्यम से जारी रख सकती है। जहां तक केन्द्रीय वित्तीय सहायता का मामला है, यह सक्षम प्राधिकार के द्वारा जल जीवन मिशन के विस्तारीकारण की अनुमति प्रदान करने पर संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्यों को निर्गत किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री ने सांसद महतो को स्पष्ट किया है कि जल जीवन मिशन योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए मिशन के गाईडलाइन के तहत सभी संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

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