सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड में अब पीक ऑवर के दौरान होने वाली बिजली कटौती से राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य की बिजली वितरण कंपनी जेबीवीएनएल बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाने के लिए बड़े स्तर पर पावर स्टोरेज सिस्टम विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत करीब 500 मेगावाट क्षमता का पावर बैंक बनाया जाएगा, ताकि अतिरिक्त बिजली को जरूरत के समय उपयोग में लाया जा सके।

यह भी पढ़ें: चेक बाउंस केस में गैर-जमानती वारंट के बावजूद पार्षद चुनाव लड़ रहीं ममता देवी
अतिरिक्त बिजली से बनेगा मजबूत सिस्टम
राज्य में जल्द ही पतरातू प्लांट की दूसरी यूनिट चालू होने जा रही है, जिससे लगभग 650 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इससे झारखंड में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और स्टोरेज सिस्टम के जरिए पीक ऑवर में भी निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने की योजना है।
गर्मियों में बढ़ती मांग बनेगी आसान
गर्मी के मौसम में अचानक बढ़ने वाली बिजली मांग, उद्योगों का अतिरिक्त लोड और सोलर-विंड ऊर्जा की अनिश्चितता लंबे समय से चुनौती रही है। नया पावर स्टोरेज सिस्टम कम मांग के समय बनी बिजली को स्टोर कर ज्यादा मांग के समय ग्रिड में भेजने का काम करेगा, जिससे कटौती और महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता कम होगी।
जमीन की तलाश और योजना पर काम
स्टोरेज सिस्टम के लिए लगभग 750 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। निगम ने संबंधित एजेंसियों से जमीन की उपलब्धता की जानकारी मांगी है। अधिकारियों के मुताबिक, एक मेगावाट स्टोरेज के लिए औसतन डेढ़ एकड़ जमीन की आवश्यकता पड़ती है।
अन्य राज्यों से मिल रही प्रेरणा
देश के कई राज्य पहले ही बैटरी स्टोरेज सिस्टम को अपनाकर पीक ऑवर सप्लाई को संतुलित कर रहे हैं। दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों में सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के साथ स्टोरेज सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिससे ऊर्जा प्रबंधन बेहतर हो रहा है।
क्या है पावर स्टोरेज सिस्टम?
यह तकनीक अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में सुरक्षित रखती है और जरूरत के समय उसे ग्रिड में वापस भेजती है। आमतौर पर इसमें लिथियम-आयन बैटरियों का उपयोग किया जाता है, जिससे बिजली आपूर्ति में स्थिरता बनी रहती है।










