सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ा बड़ा संकट सामने आया है। राज्य के करीब 9 लाख अंत्योदय कार्डधारक पिछले 13 महीनों से चीनी से वंचित हैं। योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को हर महीने एक किलो चीनी मिलनी चाहिए, लेकिन लगातार आपूर्ति बाधित रहने के कारण वितरण पूरी तरह ठप है। इसका असर सबसे ज्यादा गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ा है।

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स्थिति सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। जुलाई 2025 से राज्य के राशनकार्डधारकों को चना दाल और नमक भी नहीं मिल पा रहा है। नियमों के अनुसार हर कार्डधारक को एक किलो चना दाल और एक किलो नमक देने का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही। हालांकि चावल और गेहूं का वितरण नियमित रूप से जारी है, जिससे आंशिक राहत जरूर मिल रही है।
सूत्रों के अनुसार चीनी की खरीद के लिए कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी कारणवश आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। प्रशासनिक प्रक्रिया और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के चलते वितरण प्रभावित हुआ है। इससे लाखों परिवारों की थाली से जरूरी खाद्य सामग्री गायब हो गई है।
राज्य में लगभग 2.61 करोड़ लोग PDS के माध्यम से राशन प्राप्त करते हैं, जिनमें करीब 25 लाख ग्रीन राशन कार्डधारक भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों के लिए नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
फेयर प्राइस शॉप डीलर्स का कहना है कि त्योहारों के समय भी अंत्योदय कार्डधारकों को चीनी नहीं मिलना चिंता का विषय है। होली जैसे पर्व पर भी जरूरतमंद परिवारों की थाली से मिठास गायब रही। डीलर्स का दावा है कि वे लगातार उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान सामने नहीं आया।
झारखंड PDS संकट ने गरीब परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों पर सीधा असर डाला है। अब सवाल यह है कि सरकार कब तक चीनी, चना दाल और नमक की आपूर्ति बहाल कर पाएगी, ताकि राशन योजना का लाभ सही मायने में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।









