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सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति मुर्मु की नाराजगी, ममता पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप, बढ़ी सियासी तकरार

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। आमतौर पर शांत और संयमित रहने वाली राष्ट्रपति ने इस बार कार्यक्रम की व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर असंतोष व्यक्त किया।

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राष्ट्रपति सिलीगुड़ी में विश्व आदिवासी सम्मेलन से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनसे नाराज क्यों हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी उनकी “छोटी बहन” जैसी हैं, लेकिन कार्यक्रम में जिस तरह की स्थिति बनी, उससे वह हैरान हैं।

प्रोटोकॉल का पालन न होने का आरोप

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में संकेत दिया कि उनके दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। सामान्य तौर पर राष्ट्रपति के आगमन पर राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री या मुख्यमंत्री की मौजूदगी अपेक्षित होती है, लेकिन कार्यक्रम में राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद नहीं था।

बताया गया कि राष्ट्रपति के स्वागत के लिए केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देव मौजूद थे। इसी वजह से कार्यक्रम के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े होने लगे। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कार्यक्रम स्थल पर लोगों की संख्या उम्मीद से काफी कम थी।

कार्यक्रम स्थल बदलने पर भी उठे सवाल

राष्ट्रपति ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि कार्यक्रम का स्थान अंतिम समय में बदल दिया गया। पहले यह आयोजन सिलीगुड़ी के बिधाननगर इलाके में प्रस्तावित था, लेकिन बाद में सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर इसे बागडोगरा हवाईअड्डे के पास आयोजित किया गया। राष्ट्रपति का कहना था कि यदि कार्यक्रम पहले तय स्थान पर ही होता तो अधिक संख्या में लोग शामिल हो सकते थे और आदिवासी समुदाय के लोगों को भी भाग लेने का बेहतर अवसर मिलता।

आदिवासियों को रोकने का आरोप

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि कई आदिवासी लोगों को कार्यक्रम में आने से रोका गया। उन्होंने कहा कि अगर कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित होता तो अधिक लोग उपस्थित होते। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज्य प्रशासन ने पहले तय किए गए स्थान पर कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी। उनके अनुसार इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आदिवासी समुदाय की भागीदारी सीमित हो गई।

भाजपा और टीएमसी के बीच बढ़ी सियासत

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने प्रोटोकॉल की मर्यादा का पालन नहीं किया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसे गंभीर मामला बताते हुए राज्य सरकार की आलोचना की।

ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी का कहना है कि भाजपा संविधानिक संस्थाओं को भी राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार विपक्ष इस पूरे मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

सियासी विवाद और गहरा

सिलीगुड़ी में हुई इस घटना के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां भाजपा इसे राष्ट्रपति के अपमान का मामला बता रही है, वहीं टीएमसी इसे राजनीतिक विवाद बनाने का आरोप लगा रही है। इस घटना ने एक बार फिर बंगाल की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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