सोशल संवाद / डेस्क : मध्य पूर्व में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में सुरक्षा और समुद्री सीमाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत की समुद्री सीमा कितनी दूर तक फैली है और भारतीय नौसेना कितनी दूरी तक तैनात होकर देश की सुरक्षा कर सकती है।

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कितनी है भारत की समुद्री सीमा
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार हर तटीय देश की समुद्री सीमा अलग-अलग हिस्सों में तय होती है। भारत के मामले में भी समुद्री अधिकार कई स्तरों पर लागू होते हैं।
- 12 समुद्री मील (लगभग 22 किमी) – इसे भारत का टेरिटोरियल वाटर कहा जाता है, जहां देश की पूर्ण संप्रभुता होती है।
- 24 समुद्री मील – यह कॉन्टिग्यूस ज़ोन कहलाता है, जहां भारत सुरक्षा और कस्टम नियम लागू कर सकता है।
- 200 समुद्री मील (लगभग 370 किमी) – इसे एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) कहा जाता है, जहां भारत को समुद्री संसाधनों पर विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं।
इस क्षेत्र के भीतर भारत तेल-गैस, मछली पकड़ने और अन्य समुद्री संसाधनों का उपयोग कर सकता है।
भारतीय नौसेना कितनी दूर तक जा सकती है
हालांकि कानूनी समुद्री सीमा 200 समुद्री मील तक मानी जाती है, लेकिन भारतीय नौसेना की तैनाती केवल इसी सीमा तक सीमित नहीं होती। जरूरत पड़ने पर नौसेना अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में भी मिशन और सुरक्षा अभियान चला सकती है।
भारतीय नौसेना पहले भी हिंद महासागर, अरब सागर, दक्षिण चीन सागर और अफ्रीका के पास अदन की खाड़ी तक अपने जहाज तैनात कर चुकी है।
क्यों महत्वपूर्ण है समुद्री सुरक्षा
भारत की लगभग 90% से अधिक विदेशी व्यापार गतिविधियां समुद्री मार्गों से होती हैं, इसलिए समुद्री सुरक्षा देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण भी भारत अपने समुद्री मार्गों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखता है।
हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक भूमिका
भारत की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर के बीच में होने के कारण बेहद रणनीतिक मानी जाती है। यही वजह है कि भारतीय नौसेना को क्षेत्र में “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” यानी समुद्री सुरक्षा प्रदान करने वाली ताकत के रूप में भी देखा जाता है।
अमेरिका-इज़राइल-ईरान जैसे वैश्विक तनावों के बीच भारत की समुद्री सीमा और नौसेना की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत के पास 200 समुद्री मील का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन है, लेकिन जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना दुनिया के अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में तैनात होकर सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सकती है।









