सोशल संवाद/डेस्क : भारतीय थाली में चावल का विशेष स्थान है। देश के कई हिस्सों में यह रोजाना के भोजन का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि चावल पकाने के तरीके को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि प्रेशर कुकर में बना चावल ज्यादा पौष्टिक होता है या फिर भगोने में उबालकर बनाया गया चावल। दोनों तरीकों के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं, इसलिए यह समझना जरूरी है कि किस स्थिति में कौन सा तरीका बेहतर हो सकता है।

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आमतौर पर घरों में चावल पकाने के दो मुख्य तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। पहला तरीका है प्रेशर कुकर में चावल पकाना और दूसरा तरीका है अधिक पानी में चावल उबालकर उसका माड़ अलग कर देना। इन दोनों प्रक्रियाओं के कारण चावल के पोषक तत्वों और स्टार्च की मात्रा पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।
प्रेशर कुकर में पके चावल के फायदे
प्रेशर कुकर में चावल पकाते समय इस्तेमाल किया गया पानी पूरी तरह चावल में ही समा जाता है। इस कारण पानी में घुलने वाले कई पोषक तत्व जैसे विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और मिनरल्स चावल में ही बने रहते हैं। यही वजह है कि पोषण के दृष्टिकोण से यह तरीका काफी फायदेमंद माना जाता है।
इस तरीके से बने चावल में पोषक तत्वों की मात्रा अधिक रहती है, जिससे शरीर को जरूरी ऊर्जा और पोषण मिलता है। खासकर उन लोगों के लिए यह तरीका बेहतर माना जाता है जिन्हें पर्याप्त कैलोरी और पोषण की आवश्यकता होती है।
हालांकि इस तरीके की एक कमी भी है। क्योंकि चावल का पूरा स्टार्च इसी में रहता है, इसलिए इसमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो सकती है। यही कारण है कि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज के मरीजों या वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों को इस तरीके से बने चावल का सीमित सेवन करना चाहिए।
भगोने में उबले चावल के फायदे
दूसरे तरीके में चावल को अधिक पानी में उबाला जाता है और पकने के बाद अतिरिक्त पानी यानी माड़ को अलग कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में चावल का काफी स्टार्च पानी के साथ निकल जाता है। इससे चावल हल्का हो जाता है और उसमें कैलोरी की मात्रा भी कम हो जाती है।
यही वजह है कि कई लोग वजन नियंत्रित रखने या हल्का भोजन लेने के लिए इस तरीके को पसंद करते हैं। इसके अलावा कुछ अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि चावल को उबालकर उसका पानी निकाल देने से कुछ अशुद्धियां भी कम हो सकती हैं। हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान चावल के साथ कुछ विटामिन और मिनरल्स भी पानी में घुलकर बाहर निकल जाते हैं। इस कारण पोषण के मामले में यह तरीका प्रेशर कुकर की तुलना में थोड़ा कम लाभदायक माना जाता है।
सेहत के हिसाब से करें चुनाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि चावल पकाने का सही तरीका व्यक्ति की जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा पोषण और ऊर्जा की जरूरत है, तो प्रेशर कुकर में पका चावल बेहतर विकल्प हो सकता है।
वहीं यदि कोई व्यक्ति वजन कम करना चाहता है या डायबिटीज जैसी समस्या से जूझ रहा है, तो अधिक पानी में उबालकर माड़ निकालने वाला तरीका बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, दोनों तरीकों के अपने फायदे और सीमाएं हैं। इसलिए अपनी सेहत, खानपान की आदतों और जरूरतों के अनुसार चावल पकाने का तरीका चुनना ज्यादा समझदारी भरा फैसला माना जाता है।









