सोशल संवाद/डेस्क : देश में मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के बीच इन दिनों एक खबर तेजी से वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि सरकार जल्द ही मोबाइल डेटा पर नया टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत हर एक जीबी इंटरनेट डेटा पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इस खबर के सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स के बीच इसे लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई है।

ये भी पढे : 1984 सिख दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग पर हाईकोर्ट में सुनवाई, सरकार से मांगा जवाब
रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि मोबाइल डेटा के हर जीबी इस्तेमाल पर करीब एक रुपये तक का अतिरिक्त टैक्स लगाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो इंटरनेट सेवाएं पहले की तुलना में महंगी हो सकती हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ दावा
हाल के दिनों में कई पोस्ट और मैसेज तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि सरकार डिजिटल सेवाओं से राजस्व बढ़ाने के लिए इंटरनेट डेटा पर नया टैक्स लगाने की योजना बना रही है। इन पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि मोबाइल इंटरनेट के इस्तेमाल पर सीधे अतिरिक्त शुल्क जोड़ा जा सकता है।

हालांकि इस तरह की जानकारी की अभी तक किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली कई खबरें अक्सर अधूरी या भ्रामक भी हो सकती हैं, इसलिए किसी भी जानकारी को सही मानने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी होता है।
इंटरनेट यूजर्स में बढ़ी चिंता
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां मोबाइल इंटरनेट की कीमतें अपेक्षाकृत कम मानी जाती हैं। सस्ते डेटा के कारण ही देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में यदि मोबाइल डेटा पर किसी तरह का नया टैक्स लगाया जाता है, तो इसका असर करोड़ों यूजर्स पर पड़ सकता है। छात्रों, ऑनलाइन काम करने वाले पेशेवरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर व्यवसायों के लिए इंटरनेट एक जरूरी साधन बन चुका है। इसलिए डेटा महंगा होने की संभावना की खबर से कई लोग चिंतित भी नजर आ रहे हैं।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर टैक्स लगाने से पहले सरकार को कई आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर विचार करना पड़ता है। डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट की सुलभता और किफायती कीमत भी बेहद महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इंटरनेट सेवाओं पर पहले से ही कई प्रकार के टैक्स लागू होते हैं, जैसे टेलीकॉम सेवाओं पर जीएसटी। ऐसे में किसी नए टैक्स की संभावना पर फैसला लेने से पहले सरकार को व्यापक समीक्षा करनी होती है।
अभी नहीं हुई कोई आधिकारिक घोषणा
फिलहाल मोबाइल डेटा पर नए टैक्स को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है या नहीं। जानकारों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा नहीं होती, तब तक सोशल मीडिया पर फैल रही इन खबरों को सावधानी के साथ देखना चाहिए।
कुल मिलाकर, मोबाइल डेटा पर संभावित टैक्स को लेकर चर्चा जरूर तेज हो गई है, लेकिन फिलहाल यह केवल अटकलों और वायरल दावों तक ही सीमित नजर आ रही है। आने वाले समय में सरकार की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।









