सोशल संवाद/डेस्क: भारत सरकार ने National Highway पर टोल वसूली को अधिक प्रभावी और अनुशासित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क दरों का निर्धारण और संग्रह (दूसरा संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित करते हुए सरकार ने टोल भुगतान से बचने या देरी करने वालों के लिए सख्त प्रावधान लागू कर दिए हैं। यह नया नियम 17 मार्च से पूरे देश में प्रभावी हो चुका है और इसका उद्देश्य टोल प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी मजबूती लाना है।

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नए नियम के तहत अब यदि कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है और निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान नहीं करता है, तो उसे बकाया राशि का दोगुना भुगतान करना होगा। यानी टोल भुगतान में लापरवाही अब सीधे तौर पर जेब पर भारी पड़ने वाली है। यह कदम खासतौर पर उन मामलों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जहां वाहन टोल से गुजर तो जाते हैं, लेकिन भुगतान नहीं करते या किसी तकनीकी या अन्य कारणों से शुल्क लंबित रह जाता है।
इस संशोधन में “अनपेड यूजर फीस” की एक स्पष्ट परिभाषा भी जोड़ी गई है। इसके अनुसार, यदि किसी वाहन के गुजरने की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम में दर्ज हो जाती है, लेकिन उससे संबंधित शुल्क प्राप्त नहीं होता, तो उसे बकाया माना जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को ट्रैक करने के लिए डिजिटल और तकनीक आधारित तंत्र का उपयोग किया जाएगा, जिससे हर वाहन की आवाजाही और भुगतान की स्थिति का सटीक रिकॉर्ड रखा जा सके।
इतना ही नहीं, अब ऐसे मामलों में वाहन के पंजीकृत मालिकों को सीधे इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजे जाएंगे। इन नोटिस में वाहन का नंबर, टोल पार करने की तारीख, स्थान और बकाया राशि का पूरा विवरण दिया जाएगा। यह नोटिस SMS, ईमेल, मोबाइल एप्लिकेशन या अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए भेजे जाएंगे, जिससे सूचना तुरंत संबंधित व्यक्ति तक पहुंच सके और समय रहते भुगतान किया जा सके।
सरकार का मानना है कि यह नया नियम न केवल टोल वसूली को अधिक व्यवस्थित बनाएगा, बल्कि नियमों के उल्लंघन पर भी प्रभावी रोक लगाएगा। साथ ही, इससे राजस्व में वृद्धि होने के साथ-साथ हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव और विकास में भी मदद मिलेगी। ऐसे में हाईवे पर यात्रा करने वाले सभी वाहन चालकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे टोल भुगतान में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें, क्योंकि अब छोटी सी चूक भी दोगुना खर्च करवा सकती है।









