सोशल संवाद/डेस्क: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘कल्याण छात्रावास (छात्रावास पोषण योजना)’ के संचालन के प्रयास को बड़ा झटका लगा है। राज्य स्तर पर की गई निविदा प्रक्रिया में शामिल सभी 14 एजेंसियां प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) मूल्यांकन में फेल हो गई हैं।

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न्यूनतम निर्धारित अंक न पाने के कारण इन सभी को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इसके बाद अब जिला स्तर पर ही संस्थाओं का चयन करने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीते 27 अप्रैल को कल्याण विभाग अंतर्गत चल रही कई योजनाओं की समीक्षा की थी। इसी कड़ी में उन्होंने राज्य के सभी 23 जिलों में चल रहे छात्रावास की स्थिति की समीक्षा की थी।
दो बार निकाली गई निविदा, दोनों बार विफलताः
छात्रावास के बेहतर संचालन और प्रबंधन के लिए गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ), ट्रस्ट, कंपनियों और स्वयं सहायता समूहों को सूचीबद्ध किया जाना था। इसके लिए विभागीयस्तर पर प्रक्रिया शुरू की गई थी। पहली निविदा 15 फरवरी 2025 को ऑनलाइन प्रकाशित हुई। इसमें कुल 144 निविदा दाताओं ने भाग लिया। कार्यालय के आदेशानुसार 29 मार्च 2025 को इसे रद्दकर दिया गया। दूसरी निविदा 30 मार्च 2025 को आंशिक संशोधन के साथ दोबारा जारी हुई। इसमें कुल 215 एजेंसियों ने आवेदन किया। फिर निविदा निष्पादन सह मूल्यांकन समिति ने आवेदनों का तकनीकी मूल्यांकन किया।
इसके बाद सिर्फ 14 निविदा दाताओं को प्रस्तुतीकरण के लिए आमंत्रित किया गया था। निविदा की शर्तों के अनुसार, इस चरण में सफल होने के लिए न्यूनतम 30 अंक लाना अनिवार्य था। हालांकि, सभी 14 एजेंसियां इस मापदंड को पूरा करने में
असफल रहीं और अयोग्य हो गईं। यानी एनजीओ, ट्रस्ट, कंपनियों और स्वयं सहायता समूहों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया पिछले एक साल से अधिक समय से लंबित है। राज्य स्तर पर निविदाविफल होने और जिला स्तर पर छात्रावास की
संख्या एवं उनकी वर्तमान स्थिति से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए नया रास्ता चुना जा रहा है। अब संबंधित कार्यालय द्वारा विभाग से अनुरोध किया गया है कि जिला स्तर पर ही संस्थाओं का चयन करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाए।








