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YouTube का बड़ा कदम: अब AI Deepfake Videos की पहचान करेगा नया सिस्टम

By Riya Kumari

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YouTube का बड़ा कदम: अब AI Deepfake Videos की पहचान करेगा नया सिस्टम

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सोशल संवाद / डेस्क : वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube ने बढ़ते Deepfake खतरे को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कंपनी अब अपने AI आधारित “Likeness Detection” सिस्टम को बड़े स्तर पर रोलआउट कर रही है, जिससे क्रिएटर्स और आम यूजर्स अपनी नकली AI वीडियो की पहचान कर सकेंगे।

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क्या है YouTube का नया AI Likeness Detection Tool?

YouTube का यह नया फीचर AI से बनाए गए Deepfake वीडियो को पहचानने के लिए तैयार किया गया है। यह सिस्टम किसी व्यक्ति के चेहरे जैसी दिखने वाली AI-generated वीडियो को स्कैन करता है और संदिग्ध कंटेंट मिलने पर यूजर को अलर्ट भेजता है।

कंपनी के मुताबिक यह तकनीक काफी हद तक Content ID सिस्टम की तरह काम करती है, लेकिन यहां कॉपीराइट कंटेंट की जगह चेहरे और पहचान की सुरक्षा पर फोकस किया गया है।

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

शुरुआत में यह फीचर केवल चुनिंदा YouTube पार्टनर क्रिएटर्स के लिए उपलब्ध था, लेकिन अब इसे 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी योग्य क्रिएटर्स और कई देशों के यूजर्स तक बढ़ाया जा रहा है।

YouTube पहले ही इस टूल को पत्रकारों, राजनीतिक नेताओं, सेलिब्रिटीज और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों तक भी पहुंचा चुका है।

कैसे करेगा काम?

इस सिस्टम को एक्टिवेट करने के लिए यूजर को अपनी फेस वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद YouTube AI तकनीक की मदद से प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने वाले वीडियो स्कैन करेगा। अगर किसी वीडियो में AI से बदला गया या नकली चेहरा मिलता है, तो यूजर उसे रिव्यू कर हटाने की शिकायत दर्ज करा सकता है।

Deepfake खतरे को लेकर बढ़ी चिंता

पिछले कुछ वर्षों में AI Deepfake वीडियो तेजी से बढ़े हैं। इनका इस्तेमाल फर्जी न्यूज, धोखाधड़ी, सेलिब्रिटी फेक वीडियो और ऑनलाइन स्कैम में किया जा रहा है। कई मामलों में लोगों की आवाज और चेहरे का गलत इस्तेमाल भी सामने आया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि YouTube का यह कदम डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन पहचान की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

यूजर्स की प्राइवेसी पर भी जोर

YouTube ने साफ किया है कि यूजर्स द्वारा दी गई फेस डेटा जानकारी केवल पहचान सत्यापन और Deepfake डिटेक्शन के लिए इस्तेमाल होगी। कंपनी का दावा है कि इस डेटा का उपयोग AI ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाएगा।

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