सोशल संवाद / डेस्क : Jharkhand के Chakradharpur और Chaibasa में इंसानियत, सामाजिक एकजुटता और मदद की एक भावुक मिसाल देखने को मिली। गंभीर हालत में ट्रेन से उतारी गई गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे की जान बचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों और आम लोगों ने मिलकर ऐसा काम किया, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। टीम बैरम खान की तत्परता और लोगों के सहयोग से समय से पहले जन्मी बच्ची “अबीरा शेख” और उसकी मां को नया जीवन मिला।

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ट्रेन से उतारी गई थी गर्भवती महिला
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब 6 बजे Chakradharpur रेलवे अस्पताल से सामाजिक कार्यकर्ता और अंजुमन इस्लामिया के सचिव बैरम खान को सूचना मिली कि Kurla-Santragachi ट्रेन से एक गर्भवती महिला को गंभीर हालत में उतारा गया है। महिला की स्थिति बेहद नाजुक थी और तत्काल ऑपरेशन की जरूरत थी।
रेलवे अस्पताल में एनेस्थीसिया डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण इलाज संभव नहीं हो पा रहा था। महिला का पहला बच्चा भी ऑपरेशन से हुआ था, इसलिए मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया।
अस्पतालों में डॉक्टर की तलाश
रेलवे अस्पताल की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था कर महिला को सदर अस्पताल Chaibasa भेजा गया। दूसरी ओर टीम बैरम खान के संयोजक मोहम्मद शहजादा लगातार अस्पतालों से संपर्क कर रहे थे, लेकिन रविवार होने के कारण वहां भी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं थे।
मां और बच्चे दोनों की जान खतरे में थी। स्थिति बिगड़ती देख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तुरंत निजी मुंद्रा अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला लिया।
ऑपरेशन के बाद गूंजी बच्ची की आवाज
ऑपरेशन सफल रहा और बच्ची ने जन्म लिया, लेकिन जन्म के बाद कुछ देर तक बच्ची नहीं रोई। इससे अस्पताल में मौजूद सभी लोगों की सांसें थम गईं। डॉक्टरों की टीम लगातार प्रयास करती रही और आखिरकार नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पूरे अस्पताल में राहत और खुशी का माहौल बन गया।
डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची का जन्म तय समय से करीब डेढ़ महीना पहले हुआ, इसलिए वह काफी कमजोर थी और उसे लगातार निगरानी में रखा गया।
बच्ची का नाम रखा गया “अबीरा शेख”
टीम बैरम खान के सहयोग से बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र भी बनवाया गया। नवजात का नाम “अबीरा शेख” रखा गया।
- पिता : शेख मोहम्मद अरमान अली
- माता : सबीना खातून
बताया गया कि परिवार महाराष्ट्र से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के आरामबाग जा रहा था।
आर्थिक मदद और AC एंबुलेंस की व्यवस्था
डॉक्टरों ने नवजात और मां की हालत को देखते हुए लंबी ट्रेन यात्रा से मना कर दिया। इसके बाद टीम बैरम खान फिर मदद के लिए आगे आई। परिवार के लिए AC एंबुलेंस की व्यवस्था कराई गई, जिसका खर्च करीब 13 हजार रुपये था। साथ ही परिवार को 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई।
टीम के सदस्यों ने बच्ची के लिए कपड़े, खिलौने, मॉस्किटो नेट, गद्दा और कई जरूरी सामान भी उपलब्ध कराए।
परिवार ने जताया आभार
बच्ची के पिता शेख मोहम्मद अरमान अली ने भावुक होकर कहा कि Chakradharpur और Chaibasa के लोगों ने जिस तरह मदद की, उसे वे जिंदगीभर नहीं भूलेंगे।
इंसानियत की बनी मिसाल
आज के समय में जहां संवेदनहीनता की खबरें अक्सर सामने आती हैं, वहीं यह घटना समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है। धर्म, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर लोगों ने साबित किया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।
टीम के सक्रिय सदस्य मोहम्मद इकरामुल हक ने बताया कि पिछले सात वर्षों से उनका व्हाट्सएप ग्रुप जरूरतमंदों की मदद करता आ रहा है। टीम में Jharkhand और Odisha के कई लोग जुड़े हैं, जो समय-समय पर सामाजिक कार्यों में सहयोग करते रहते हैं।










