सोशल संवाद / डेस्क : Jharkhand के पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड में महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के अंतर्गत गठित संकुल संगठन की दीदियों द्वारा “पलाश नोटबुक निर्माण केंद्र” की स्थापना की गई, जो आज सफलता की नई कहानी लिख रहा है।

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10 लाख रुपये के ऋण से शुरू हुआ व्यवसाय
संकुल संगठन की 7 महिलाओं ने मिलकर 10 लाख रुपये का ऋण लिया और नोटबुक निर्माण का काम शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, क्योंकि किसी भी सदस्य के पास मशीन संचालन या इलेक्ट्रॉनिक कार्य का पूर्व अनुभव नहीं था। इसके बावजूद इन महिलाओं ने हार नहीं मानी और मेहनत के दम पर खुद को सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया।
तीन चरणों में मिला विशेष प्रशिक्षण
महिलाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए Ranchi से आए विशेषज्ञों द्वारा तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मशीन संचालन, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने और मार्केटिंग रणनीति की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया और व्यवसाय को नई दिशा दी।

प्रतिदिन बन रही हैं 1000 नोटबुक
वर्तमान में पलाश नोटबुक निर्माण केंद्र में प्रतिदिन लगभग 1000 नोटबुक तैयार की जा रही हैं। शुरुआत में बाजार में पहचान बनाने के लिए उत्पाद कम मुनाफे पर बेचे गए, लेकिन अब गुणवत्ता और बेहतर ब्रांड पहचान के कारण बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।
स्कूलों और दुकानों तक पहुंच रहे उत्पाद
संकुल संगठन की सदस्य रोमा गोडसरे के अनुसार नोटबुक की बिक्री मुख्य रूप से स्कूलों और खुदरा दुकानदारों के माध्यम से की जा रही है। अच्छी गुणवत्ता और कम कीमत की वजह से बाजार में इनकी मांग स्थिर बनी हुई है।

उपायुक्त ने की पहल की सराहना
पश्चिमी सिंहभूम के जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने खूंटपानी प्रखंड भ्रमण के दौरान इस केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए लोगों से अपील की कि वे अपने घरों, बच्चों और कार्यालयों के लिए यहां से नोटबुक खरीदें।
उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं और समाज की प्रगति में अहम योगदान दे सकती हैं।
राज्य स्तरीय सरस मेले में भी मिली पहचान
डीपीएम JSLPS अशियानी मारकी ने बताया कि पलाश नोटबुक निर्माण केंद्र ने राज्य स्तरीय सरस मेले में भी जिले का प्रतिनिधित्व किया, जहां लोगों ने इनके कार्यों की काफी सराहना की। अब इन उत्पादों को विभिन्न स्थानीय मेलों में भी प्रदर्शित किया जा रहा है।
चूल्हा-चौका से सफल उद्यमी बनने तक का सफर
आज ये महिलाएं केवल घर-गृहस्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। नोटबुक निर्माण से होने वाली आय से वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं और सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।
यह कहानी उन महिलाओं के साहस, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद आत्मनिर्भरता की राह चुनी और आज सफलता हासिल कर रही हैं।











