सोशल संवाद / जमशेदपुर : कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) के अंतर्गत सात नए डिग्री कॉलेजों में पद-सृजन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार विभिन्न कॉलेजों में शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों की संख्या तय कर दी गई है।

यह भी पढे : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 1265 भर्ती
इससे जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ होगा। सात कॉलेजों के लिए कुल 152 पद सृजित किए गए हैं। हालांकि सभी नए कॉलेजों में केवल असिस्टेंट प्रोफेसर पद ही सृजित किए गए हैं। एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर का एक भी पद नहीं होने से उच्च स्तरीय शैक्षणिक नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना नए कॉलेजों में वर्ष 2027 से शैक्षणिक सत्र शुरू करने की है। इसके लिए भवन निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिसे इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। शुरुआती चरण में इन कॉलेजों में यूजी (स्नातक) के सामान्य व वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। बाद में पीजी (स्नातकोत्तर) की पढ़ाई होगी। इन कॉलेज का भवन निर्माण कार्य समय पर पूरा हो, इसके लिए विवि की ओर से कमेटी बनाई गई है।
कॉलेजवार पद सृजन :
- डिग्री कॉलेज बोड़ाम 17
- डिग्री कॉलेज पोटका 23
- डिग्री कॉलेज गम्हरिया 23
- डिग्री कॉलेज बंदगांव 23
- डिग्री कॉलेज हाट गम्हरिया 23
- डिग्री कॉलेज राजनगर 23
- डिग्री कॉलेज चाकुलिया 21
अक्टूबर तक तैयार होगा बोड़ाम डिग्री कॉलेज का भवन, अगले साल से दाखिले की तैयारी
सात नए कॉलेजों की बात करें तो सबसे पहले बोड़ाम डिग्री कॉलेज को नया भवन मिलेगा। इस कॉलेज के भवन का निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो गया है। शेष काम फंड के कमी की वजह से रूका हुआ था। लेकिन अब विवि इसके लिए फंड जारी करने जा रहा है। इसके बाद तीन महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य ठेकेदार को दिया जाएगा। विवि का कहना है- सितंबर से अक्टूबर तक इस कॉलेज के भवन का काम पूरा करा लिया जाएगा। इस पर करीब 15 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को मिलेगी मजबूती
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है- इन पदों के सूजन से शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा और क्षेत्र में उच्च शिक्षा को मजबूती मिलेगी। लंबे समय से इन कॉलेजों में संसाधनों और स्टाफ की कमी महसूस की जा रही थी। इ से दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस पहल से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, कॉलेजों के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने में भी यह निर्णय अहम साबित होगा।










