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जनगणना 2026-27 में कुड़मालि भाषा को लेकर दिल्ली में अहम बैठक, गृह मंत्रालय से मिला बड़ा अपडेट

By Riya Kumari

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जनगणना 2026-27 में कुड़मालि भाषा को लेकर दिल्ली में अहम बैठक, गृह मंत्रालय से मिला बड़ा अपडेट
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सोशल संवाद / डेस्क : नई दिल्ली में 26 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना विभाग के भाषा प्रभाग (Language Division) के साथ आदिवासी कुड़मि समाज- दिल्ली के प्रतिनिधिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का नेतृत्व युवा आंदोलनकारी अमित महतो ने किया, जो “रेल ठेका-डहर छेका” आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं।

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कुड़मालि भाषा और जातीय पहचान पर हुई चर्चा

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करीब दो घंटे चली इस बैठक में आगामी जनगणना 2026-27 में कुड़मि समाज और उनकी मातृभाषा ‘कुड़मालि’ के सही वर्गीकरण और पहचान को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि आने वाली जनगणना में भी भाषा को पहले की तरह “Kurmali Thar” नाम से दर्ज किया जाएगा।

पिछली जनगणना में हुई थीं कई गड़बड़ियां

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 2011 और उससे पहले की जनगणनाओं में लोग “Kudmali”, “Kurmali”, “Kurmi” या “Kudmi” अलग-अलग तरीके से लिखते रहे, जिसके कारण सही आंकड़े दर्ज नहीं हो पाए। तकनीकी कारणों और स्पष्ट कोड की कमी की वजह से कई डेटा अन्य भाषा समूहों में शामिल हो गए थे।

समाज ने रखी बड़ी मांग

प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मांग की कि “Kurmali Thar” के साथ ब्रैकेट में “Kudmali/कुड़मालि” भी जोड़ा जाए, ताकि समाज के लोगों में किसी प्रकार का भ्रम न रहे और सही पहचान सुनिश्चित हो सके।

8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग फिर उठी

बैठक के दौरान कुड़मालि भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधियों ने याद दिलाया कि पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए थे। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

आंदोलन की चेतावनी

युवा आंदोलनकारी अमित महतो ने कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार जल्द ही कुड़मालि भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू नहीं करती हैं, तो झारखंड, बंगाल, ओडिशा और असम में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

जनजागरूकता अभियान चलाने की तैयारी

समाज की ओर से अब रांची, कोलकाता, भुवनेश्वर, दिल्ली और असम में क्षेत्रीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। साथ ही समाज के लोगों के लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी कि जनगणना फॉर्म में भाषा और जाति का सही उल्लेख कैसे करना है।

अमित महतो की लोगों से अपील

अमित महतो ने देशभर के लोगों से अपील की कि वे जनगणना 2026-27 में अपनी जाति, जनजाति, धर्म और भाषा सही तरीके से दर्ज करें। उन्होंने कहा कि सही आंकड़े सामने आने से क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, शिक्षा और रोजगार में समाज को उचित भागीदारी मिल सकेगी।

बैठक में मुख्य रूप से अमित महतो, पंकज महतो, मुकेश महतो और दीपक महतो मौजूद रहे।

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