सोशल संवाद / डेस्क : देश की प्रमुख एयरलाइंस एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी घरेलू उड़ानों में कटौती करने का फैसला लिया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों और यात्रियों की मांग में कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि यह कदम ऑपरेशन को संतुलित करने और क्षमता के बेहतर इस्तेमाल के लिए उठाया गया है।

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Air India ने 22% घरेलू उड़ानें कीं कम
एयर इंडिया ने घोषणा की है कि जून से अगस्त 2026 के बीच कुछ चुनिंदा घरेलू रूट्स पर उड़ानों की संख्या में लगभग 22 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। इससे पहले कंपनी इंटरनेशनल उड़ानों में भी 27 प्रतिशत तक कमी करने का ऐलान कर चुकी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया हर सप्ताह करीब 3600 घरेलू उड़ानें संचालित करती है। यानी रोजाना लगभग 500 फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं। 22 प्रतिशत कटौती के बाद प्रतिदिन करीब 110 उड़ानें कम हो सकती हैं, जिसका असर यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर पड़ सकता है। एयरलाइन का कहना है कि यह अस्थायी फैसला है और इसका उद्देश्य परिचालन को व्यवस्थित करना है।
IndiGo भी करेगी फ्लाइट्स में कटौती
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो भी जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान अपनी घरेलू उड़ानों में लगभग 5 प्रतिशत की कटौती कर सकती है। बताया जा रहा है कि गर्मियों की छुट्टियों के बाद यात्रा मांग में गिरावट आती है, जिसे एविएशन इंडस्ट्री में ‘लीन सीजन’ कहा जाता है।
इंडिगो रोजाना करीब 2200 घरेलू उड़ानें संचालित करती है। 5 प्रतिशत कटौती के बाद एयरलाइन की लगभग 110 उड़ानें प्रतिदिन कम हो सकती हैं। पिछले साल भी इंडिगो ने इसी तरह की रणनीति अपनाई थी ताकि कम मांग वाले समय में परिचालन लागत को नियंत्रित किया जा सके।
Air India Express का फोकस अब अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर
एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी घरेलू उड़ानों में करीब 10 प्रतिशत की कमी की है। कंपनी का कहना है कि वह अब पश्चिम एशिया के लिए अपनी सेवाओं का तेजी से विस्तार कर रही है।
एयरलाइन के अनुसार भारत और पश्चिम एशिया के बीच हर सप्ताह लगभग 500 उड़ानें संचालित की जा रही हैं, जबकि पहले यह संख्या करीब 280 थी। 11 एयरपोर्ट्स पर सेवाएं बहाल होने के बाद अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में तेजी से विस्तार हुआ है। इसी वजह से कंपनी ने कुछ घरेलू रूट्स पर उड़ानों को अस्थायी रूप से कम किया है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उड़ानों में कटौती का असर टिकट कीमतों और सीट उपलब्धता पर पड़ सकता है। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान यात्रियों को महंगे टिकट और सीमित विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि एयरलाइंस कंपनियां इसे अस्थायी बदलाव बता रही हैं और मांग बढ़ने पर उड़ानों की संख्या फिर से बढ़ाई जा सकती है।









